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सोमवार, 18 अगस्त, 2008 को 02:57 GMT तक के समाचार
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कश्मीरी नेता प्रस्तावित ज्ञापन नहीं दे पाए
प्रदर्शन (फ़ाइल फ़ोटो)
हुर्रियत का कहना है कि कश्मीर मसले का समाधान वहीं के लोग कर सकते हैं
भारत प्रशासित कश्मीर में अलगाववादी नेताओं ने श्रीनगर स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय की ओर अपना प्रस्तावित मार्च किया लेकिन अपना ज्ञापन नहीं दे पाए.

वे संयु्क्त राष्ट्र को अपनी मांगों का एक ज्ञापन सौंपना चाहते थे जिसमें उनके आत्मनिर्धारण के अधिकार की मांग भी शामिल थी.

इन नेताओं ने एक रैली को संबोधित किया जिसमें हज़ारों लोगों ने हिस्सा लिया. ये लोग पाकिस्तान और आज़ादी के समर्थन में नारे लगा रहे थे.

लेकिन बाद में जब अधिकारियों ने कहा कि लोगों की भीड़ को आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा तो उन्होंने अपना मार्च रोक दिया.

ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र के स्थानीय कार्यालय पहुँचने के लिए मार्च का आह्वान किया था.

श्रीनगर से बीबीसी संवाददाता अल्ताफ़ हुसैन का कहना है कि हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस के दोनों धड़ों ने ये आह्वान किया.

 इस मार्च का मकसद अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करना है. हम चाहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ कश्मीर के मसले को हल करने में हस्तक्षेप करें
सैयद अली शाह गीलानी, हुर्रियत नेता

वर्ष 1993 के बाद पहली बार प्रदर्शनकारी संयुक्त राष्ट्र के सैन्य पर्यवेक्षकों के दफ़्तर तक मार्च करने वाले थे.

श्रीनगर में हुर्रियत के कट्टरपंथी धड़े के नेता माने जानेवाले सैयद अली शाह गीलानी और नरमपंथी धड़े के नेता मीरवाइज़ उमर फारूक़ का कहना था कि एक प्रतिनिधिमंडल संयुक्त राष्ट्र सैन्य पर्यवेक्षक के दफ़्तर जाएगा और उन्हें ज्ञापन सौंपेगा.

गीलानी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा,'' इस मार्च का मकसद अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करना है. हम चाहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ कश्मीर के मसले को हल करने में हस्तक्षेप करें.''

दूसरी ओर हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस के नरमपंथी धड़े के नेता मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ का कहना था कि मामला अब अमरनाथ ज़मीन विवाद से आगे बढ़ गया है और ये 'आज़ादी' का आंदोलन बन गया है.

इधर प्रशासन के प्रतिनिधि हुर्रियत नेता गीलानी से मिले और उनसे मार्च के दौरान शांति बनाए रखने की अपील की.

ग़ौरतलब है कि इसके पहले श्रीनगर में हुर्रियत कॉंफ़्रेंस की बड़ी रैली हुई थी जिसमें श्रीनगर-मुज़फ़्फराबाद और पुंछ-रावलकोट सड़क मार्ग खोलने की माँग की गई थी.

ये रैली पुलिस फ़ायरिंग में मारे गए हुर्रियत नेता शेख़ अज़ीज़ की याद में निकाली गई थी.

जम्मू में गिरफ़्तारियाँ

उधर, जम्मू से बीनू जोशी का कहना है कि अमरनाथ मंदिर संघर्ष समिति ने आंदोलन तेज़ करते हुए आज जम्मू में हज़ारों की संख्या में गिरफ्तारियां दी हैं.

समिति कश्मीर में अमरनाथ यात्रा के लिए देने के बाद वापस ली गई ज़मीन लौटाने के मुद्दे पर जेल भरने का आह्वान किया था.

संघर्ष समिति का दावा है कि गिरफ्तार लोगों की संख्या दो लाख से भी ज़्यादा है.

यह आंदोलन तीन दिन तक चलने वाला है.

जम्मू में संघर्ष समिति के संयोजक लीला करण शर्मा ने बताया कि जम्मू क्षेत्र के हिंदू बहुल इलाकों में भारी संख्या में गिरफ़्तारियाँ दी जा रही है.

उनके अनुसार अब तक दो लाख से भी ज़्यादा गिरफ़्तारियाँ हो चुकी हैं और यह संख्या लगातार बढ़ती जाएगी.

इससे पहले जम्मू में संघर्ष समिति के सदस्य ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) सुचेत सिंह और प्रवक्ता नरेंद्र सिंह ने बताया था कि ज़िला, तहसील और ब्लाक स्तर पर लोग गिरफ़्तारी देंगे.

उनका कहना था कि सोमवार को पुरुष, उसके बाद महिलाएँ और फिर बच्चे गिरफ़्तारियाँ देंगे.

जम्मू से कर्फ़्यू हटा लिया गया है लेकिन किश्तवाड़ में सीमित समय के लिए कर्फ़्यू अब भी जारी है.

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