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प्रचंड प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में शुक्रवार को होने वाले प्रधानमंत्री पद के चुनाव में माओवादी पार्टी के नेता प्रचंड की प्रधानमंत्री पद पर दावेदारी को मज़बूत माना जा रहा है. प्रचंड का सीधा मुक़ाबला तीन बार प्रधानमंत्री रह चुके नेपाली कांग्रेस के शेरबहादुर देऊबा से है. इस साल संविधान सभा के चुनाव में माओवादियों को सबसे ज़्यादा सीटें मिली थीं और माओवादी पार्टी सबसे शक्तिशाली राजनीतिक दल के तौर पर उभरकर सामने आई थी लेकिन दूसरे राजनीतिक दलों से उसके मतभेद बने रहे. अब माओवादी पार्टी ने मधेशी जनाधिकार फ़ोरम के साथ भी गठबंधन कर लिया है, जिसका ये अर्थ लगाया जा रहा है कि प्रचंड का प्रधानमंत्री चुना जाना लभगभ तय है. राजशाही के ख़त्म होने के बाद नेपाल में प्रधानमंत्री पद के लिए यह पहला चुनाव होगा. पिछले महीने नेपाल में राष्ट्रपति पद का चुनाव हुआ था लेकिन प्रधानमंत्री पद के लिए राजनेताओं के बीच गतिरोध बना रहा. नेपाली कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता मिनेंद्र रिजल ने माना कि देऊबा का जीतना असंभव है, लेकिन साथ ही उनका कहना था कि माओवादियों की नीतियों के बारे में उनकी पार्टी अपने गंभीर संदेहों को दर्ज करना चाहती है. उन्होंने कहा कि उनको डर है कि माओवादी 'निरंकुश कम्युनिस्ट शासन' नेपाल में लाना चाहते हैं. दरअसल, प्रचंड के विरोधी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि अभी तक देश में सशस्त्र विद्रोहियों की तरह लड़ते आए माओवादी जब प्रधानमंत्री बनेंगे तो उनका शासन का तरीका कैसा होगा. | इससे जुड़ी ख़बरें प्रधानमंत्री चुनाव में खड़े होंगे प्रचंड14 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस माओवादियों ने राष्ट्रपति पद का दावा छोड़ा05 जून, 2008 | भारत और पड़ोस हिंदी में शपथ के विरोध में प्रदर्शन28 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस 'नारायणहिती' छोड़कर 'नागार्जुन महल' गए ज्ञानेंद्र12 जून, 2008 | भारत और पड़ोस नेपाल में माओवादी मंत्रियों के इस्तीफ़े12 जून, 2008 | भारत और पड़ोस नेपाल में पहले राष्ट्रपति का चुनाव18 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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