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हिंदी में शपथ के विरोध में प्रदर्शन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में उपराष्ट्रपति के हिंदी में शपथ लेने के विरोध में वहाँ लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया है. उपराष्ट्रपति चुने गए परमानंद झा ने पिछले हफ़्ते नेपाल की आधिकारिक भाषा नेपाली के बजाय हिंदी में शपथ ली थी. इसी बात को लेकर लोगों ने सोमवार को प्रदर्शन किया और सड़क मार्ग अवरुद्ध किया. कई छात्र गुटों ने राजधानी काठमांडू में मुख्य सड़कों पर यातायात बाधित किया और परमानंद झा के ख़िलाफ़ नारे लगाए. हिंदी नेपाल के पड़ोसी देश भारत की आधिकारिक भाषाओं में से एक है. दक्षिणी नेपाल में भी आमतौर पर लोग हिंदी बोलते और समझते हैं. लेकिन हिंदी नेपाल की आधिकारिक भाषा नहीं है और चुनाव के बाद शपथ ग्रहण के दौरान लोगों को नेपाली या दूसरी जनजातीय भाषाओं में शपथ लेनी होती है. हिंदी का विरोध प्रदर्शनकारियों की माँग है कि उपराष्ट्रपति हिंदी में शपथ लेने के लिए सार्वजनिक तौर पर माफ़ी माँगे. नेपाल के सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दायर की गई है कि उपराष्ट्रपति के शपथ ग्रहण को न माना जाए और वे दोबारा नेपाली में शपथ लें. संवाददाताओं का कहना है कि इस विवाद के कारण नेपाल में राष्ट्रवादी भावनाएँ भड़क गई हैं और कई नेपालियों को लगता है कि भारतीय संस्कृति उनकी अपनी संस्कृति की कीमत पर फल फूल रही है. करीब दस दिन पहले हुए चुनाव में परमानंद झा को नेपाल का नया उपराष्ट्रपति चुना गया था. मधेशी जनअधिकार फ़ोरम के परमानंद झा को 312 मत हासिल हुए थे. उपराष्ट्रपति पद की दौड़ में माओवादी पार्टी के शांता श्रेष्ठ, नेपाली कांग्रेस के मान बहादुर विश्वकर्मा, यूएमल के अष्ट लक्ष्मी शाक्य भी शामिल थे. | इससे जुड़ी ख़बरें माओवादी सरकार नहीं बनाएँगे22 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस राम बरन यादव नेपाल के पहले राष्ट्रपति21 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस नेपाल के प्रधानमंत्री कोइराला का इस्तीफ़ा 26 जून, 2008 | भारत और पड़ोस नेपाल में माओवादी मंत्रियों के इस्तीफ़े12 जून, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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