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बुधवार, 30 जुलाई, 2008 को 17:46 GMT तक के समाचार
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'भारत पाकिस्तान को अस्थिर करना छोड़े'

वज़ीरिस्तान में पाकिस्तानी सेना
वज़ीरिस्तान में पाकिस्तान को चरमपंथी गतिविधियों का सामना करना पड़ रहा है
पाकिस्तान के आंतरिक मामलों के सलाहकार रहमान मलिक ने पाकिस्तान के क़बायली इलाकों में चल रहे ख़ून खराबे के लिए भारत और अफ़गानिस्तान पर आरोप लगाया है और कहा है कि भारत पाकिस्तान को अस्थिर करना चाहता है.

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री युसुफ़ रज़ा गिलानी के साथ अमरीका के दौरे पर आए रहमान मलिक ने ये बयान तब दिया है जब आतंकवाद के ख़िलाफ़ जंग में खुफ़िया एजेंसी आईएसआई की भूमिका पर अमरीका में सवाल उठाए जा रहे हैं.

पिछले तीन दिनों से पाकिस्तानी प्रधानमंत्री युसुफ़ रज़ा गिलानी और उनकी टीम को आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में फौज और आइएसआई की भूमिका को लेकर हर जगह मुश्किल सवालों का सामना करना पडा है.

 भारतीय ख़ुफ़िया अधिकारी बेतुल्ला मसूद, बराहमदाद बुग्ती, मंगलबाग जैसे चरमपंथियो से मिलते हैं, ख़ुफ़िया जानकारी जुटाते हैं, आख़िर क्यों
रहमान मलिक, आंतरिक सुरक्षा सलाहकार

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री अहमद मुख्तार के हवाले से ये भी कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति बुश ने गिलानी के साथ हुई मुलाक़ात के दौरान उनसे कहा कि आइएसआई का एक तबका ऐसा है जो तालिबान के ख़िलाफ़ मिली ख़ुफ़िया जानकारी को तालिबान तक लीक कर रहा है.

अमरीका में पाकिस्तानी राजदूत हुसैन हक्कानी ने बीबीसी को बताया कि पिछले तीन दिनों में इन शिकायतों को काफ़ी हद तक दूर किया गया है.

हालांकि बुधवार को जब यहां के जाने माने अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स में ये ख़बर छपी की अमरीकी खुफ़िया एजेंसी सीआईए के एक वरिष्ठ अधिकारी पाकिस्तान के दौरे पर गए थे इस बात का सबूत लेकर कि अफ़गानिस्तान में होनेवाले हमलों में तेज़ी और भारतीय दूतावास के बाहर हुए धमाके के लिए ज़िम्मेदार चरमपंथी गुटों और आइएसआई के कुछ हलकों के बीच गहरे ताल्लुकात हैं, तो यहां फिर हंगामा मच गया.

रहमान मलिक ने इस ख़बर का तो खंडन किया की लेकिन साथ में ये भी कहा कि जो कुछ हो रहा है, ख़ासकर कबायली इलाकों में उसमें भारत का हाथ है.

उनका कहना था, ``भारतीय ख़ुफ़िया अधिकारी बेतुल्ला मसूद, बराहमदाद बुग्ती, मंगलबाग जैसे चरमपंथियो से मिलते हैं, ख़ुफ़िया जानकारी जुटाते हैं, आख़िर क्यों.''

उनका ये भी कहना था कि इसमें भारत को अफ़गानिस्तान का भी साथ मिल रहा है क्योंकि और कोई वजह नहीं है कि भारत अफ़गानिस्तान में इतने सारे वाणिज्य दूतावास बनाए.

बीबीसी के साथ एक ख़ास बातचीत के दौरान रहमान मलिक ने ये भी कहा कि पाकिस्तान और भारत के रिश्तों में पिछले एक हफ़ते में नियंत्रण रेखा पर हुई गोलीबारी से थोड़े तनाव पैदा हुए हैं वो ज़्यादा देर नहीं रहेंगे और पाकिस्तान भारत के साथ बेहतर रिश्ते चाहता है.

मंगलवार को प्रधानमंत्री युसुफ़ रज़ा गिलानी ने भी भारत के साथ बेहतर होते रिश्तों की बात की थी और ये भी कहा था कि हाल ही में उनकी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से टेलीफ़ोन पर भी बात हुई थी और कश्मीर मसले के हल के साथ साथ दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने पर भी फ़ैसला हुआ था.

गिलानी ने ये भी कहा था कि कबायली इलाकों में अशांति के लिए चेचन्या, उज़बेकिस्तान से आए विदेशी चरमपंथी ज़िम्मेदार हैं.

तो फिर ऐसे में रहमान मलिक की तरफ़ से ये बयान क्यों.

पाकिस्तान की राजनीति की जानकारी रखनेवाले कुछ विश्लेषकों का कहना है कि संभव है ये प्रधानमंत्री के अमरीकी दौरे से ध्यान हटाने की कोशिश है. ख़ासतौर पर इसलिए भी क्योंकि पाकिस्तानी मीडिया में इस तरह की ख़बरें आ रही हैं कि प्रधानमंत्री और उनकी टीम ने पाकिस्तान पर होनेवाले एकतरफ़ा अमरीकी मिसाइल हमलों के ख़िलाफ़ यहां वैसी सख्ती नहीं दिखाई, जैसी दिखानी चाहिए थी.

राष्ट्रपति बुश ने ये ज़रूर ऐलान किया कि वो पाकिस्तान की संप्रभुता की हिमायत करते हैं लेकिन उसके अगले ही दिन पेंटॉगन के प्रवक्ता ने स्पष्ट तौर पर कहा कि सितंबर ग्यारह के हमले के बाद ही हम कह चुके हैं कि अमरीकी सुरक्षा के लिए जो भी करना पड़े किया जाएगा. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद के ख़िलाफ़ और सख़्त रवैया दिखाए.

इतना ही नहीं व्हाइट हाउस की तरफ़ से जारी बयान में ये भी कहा गया कि पाकिस्तान अपने पड़ोसी देशों में आतंकवाद को रोकने के लिए कदम उठाए.

बहरहाल ये ज़रूर है कि एक लंबे समय के बाद किसी पाकिस्तानी अधिकारी ने भारत के ख़िलाफ़ इस तरह के बयान दिए हैं और हो सकता है कि पिछले कुछ दिनों से बढ़े हुए तनाव के बाद इस बयान का साया कोलोंबो में होनेवाली सार्क की बैठक में भी नज़र आए.

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