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नोटों की गड्डियाँ पेश, लोकसभा में हंगामा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मंगलवार को लोकसभा में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के विश्वास मत के दौरान दोपहर को लोकसभा की कार्यवाही डेढ़ घंटे के लिए तब रुक गई जब विपक्ष के कुछ सांसदों ने अचानक कुछ बस्ते पेश किए जिनमें नोट भरे हुए थे. इसके बाद अनेक सांसद स्पीकर की कुर्सी के पास एकत्र हो गए और नारे लगाने लगे और बस्तों से निकालकर नोट दिखाने लगे. लोकसभा की कार्यवाही लगभग डेढ़ घंटे तक रुकी रही और स्पीकर सभी दलों के नेताओं से विचार-विमर्श में लगे रहे. इसके बाद लोकसभा के अंदर और बाहर सौदेबाज़ी के आरोप लगते रहे और सत्तापक्ष के अनेक नेता इनका खंडन करते रहे. मनमोहन भाषण नहीं दे पाए ग़ौरतलब है कि विपक्ष के सांसद सदन में सोमवार से ही आरोप लगा रहे थे कि सौदेबाज़ी और सांसदों की ख़रीद हो रही है. जहाँ सत्तापक्ष ने इन आरोपों को ख़ारिज किया वहीं ताज़ा घटना में भी ये स्पष्ट नहीं हुआ और न ही फ़िलहाल कोई प्रमाण सामने आए कि ये पैसा किसका है, किसे दिया गया और इसका क्या मकसद था. जब संसद की कार्यवाही दोबारा शुरु हुई तब भी लोकसभा में भीषण हंगामा होता रहा और यहाँ तक कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी अपना भाषण नहीं दे पाए और उन्हें अपना भाषण सदन के पटल पर रखना पड़ा. भाजपा और वाम मोर्चे के सदस्य लगातार प्रधानमंत्री की कुर्सी के सामने नारे लगाते रहे. स्पीकर ने प्रधानमंत्री के भाषण की प्रति को सदन के पटल पर रखे जाने पर विश्वास प्रस्ताव पर वोट का ऐलान किया. 'दुखद दिन' सदन में नौट पेश किए जाने की घटना के तत्काल बाद कार्यवाही स्थगित हुई और फिर दोबारा शुरु हुई थी. उस समय स्पीकर सोमनाथ चटर्जी ने कहा, "ये लोकसभा के लिए बहुत ही दुखद दिन है. मैंने भाजपा के तीनों माननीय सदस्यों को सुना है और उन्होंने अपनी शिकायत लिखित में भी दी है. हर संभव कदम उठाया जाएगा और जो कोई भी दोषी पाया जाएगा उसे बख़्शा नहीं जाएगा." जब विपक्ष, विशेष तौर पर भाजपा सदस्यों ने प्रधानमंत्री के इस्तीफ़े की माँग की और नारे लगाए तो स्पीकर ने कार्यवाही को स्थगित कर दिया. उन्होंने घोषणा की थी कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह विश्वास मत पर बहस का जवाब देंगे और उसके तत्काल बाद विश्वास मत पर मतदान होगा लेकिन प्रधानमंत्री अपना भाषण नहीं दे पाए. इतना ज़रूर हुआ कि पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की महबूबा मुफ़्ती, जनता दल (एस) के विरेंद्र कुमार और नेशनल कान्फ़्रेंस के उमर अब्दुल्ला ने भीषण शोर के बीच ही भाषण दिए. लोक जनशक्ति पार्टी के रामविलास पासवान और कुछ अन्य सांसदों ने भाषण नहीं दिया और भाषण को लिखित रुप में ही सदन में रखना बेहतर समझा. 'तीन सांसदों को वादा किया' उधर सदन के बाहर विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा, "जो हुआ है उसके आधार पर हम स्पीकर से माँग करेंगे कि इस मामले की वे तह तक जाएँ. ये मामला संसद के विशेषाधिकार का है और यदि झारखंड मुक्ति मोर्चा का मामला ध्यान में रखा जाए तो ये स्पष्ट भ्रष्टाचार का मामला भी है." आडवाणी ने आरोप लगाया, "भारतीय जनता पार्टी के तीन सांसदों को नौ करोड़ रुपए की पेशकश की गई. मध्यप्रदेश से हमारे सांसद अशोक अर्गल ने दो अन्य सांसदों - राजस्थान के महावीर भागौरा और मध्यप्रदेश के सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते को साथ लिया. इन्हें एक करोड़ रुपए दिए गए हैं और आठ करोड़ वादा किया गया यदि वे विश्वास मत के समर्थन में वोट देते हैं. ये पूरा लेन-देन एक प्रमुख टीवी चैनल ने स्टिंग ऑपरेशन के ज़रिए रिकॉर्ड भी किया है." आडवाणी ने पत्रकारों को बताया कि आगे की बात ये सांसद ख़ुद ही बताएँगे. आडवाणी का कहना था कि क्योंकि उनके सांसद अशोक अर्गल पहले ही आहत थे कि उनका नाम उन सांसदों की सूची में लिया जा रहा है जो बाग़ी हो सकते हैं, इसलिए उन्होंने अशोक अर्गल को इस ऑपरेशन का पर्दाफ़ाश करने की इजाज़त दे दी.
इस घटना से कुछ घंटे पहले बहुजन समाज पार्टी के एक सांसद ने केंद्रीय जाँच ब्यूरो के एक कथित अधिकारी की ओर से उन्हें धमाकाए जाने के आरोप लगाए थे और इसके बाद सदन में काफ़ी देर हंगामा होता रहा था. बसपा का धमकी मिलने का आरोप बहुजन समाज पार्टी सांसद ब्रजेश पाठक ने आरोप लगाया, "एक व्यक्ति ने ख़ुद को सीबीआई का अधिकारी बताते हुए मुझे कुछ दस्तावेज़ दिए और धमाकाया कि यदि बसपा सांसद सरकार का साथ नहीं देते तो उन्हें और बसपा अध्याक्ष मायावती को इसका ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ सकता है." जब स्पीकर ने इन दस्तावेज़ों को गृह मंत्री को सौंपने और जाँच कराने की बात की तो ये पाठक और बसपा सांसद और भड़क गए और उन्होंने कहा कि वे सदन की एक समिति से जाँच चाहते हैं और सदन की ओर से सुरक्षा चाहते हैं. इस पर स्पीकर सोमनाथ चटर्जी का कहना था कि वे पूरे दस्तावेज़ देखेंगे और फिर सांसदों की माँग को ध्यान में रखते हुए तय करेंगे कि इस मामले में क्या करना है. |
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