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मंगलवार, 22 जुलाई, 2008 को 05:57 GMT तक के समाचार
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राहुल, लालू भी बहस में शामिल हुए
राहुल
राहुल गांधी को दोपहर के भोजन से पहले भाषण पूरा नहीं करने दिया गया और शोर होने लगा
लोकसभा में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के विश्वास प्रस्ताव पर दूसरे दिन की बहस के दौरान तीखी बहस हुई है. रेल मंत्री लालू यादव, कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी और भाजपा नेता विजय मल्होत्रा ने सदन को संबोधित किया.

कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी का भाषण शोर के कारण भोजन से पहले पूरा नहीं हो पाया. उनके भाषण के दौरान ख़ासा हंगामा हुआ था और लोकसभा स्पीकर को सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पडी थी.

भोजन के बाद उन्होंने कहा, "हम इस समय देश के ऊर्जा सुरक्षा के बारे में बात करने के लिए एकत्रित हुए हैं और यह देश की एक गंभीर समस्या है." जब विपक्ष के एक सदस्य ने कहा कि ग़रीबी एक बड़ी समस्या है, तो राहुल गांधी ने कहा कि ग़रीबी का भी सीधा संबंध ऊर्जा संकट से है.

लोकसभा में मंगलवार की बहस में जिन्हें सबसे ज़्यादा ध्यान से सुना गया, जिनके भाषण पर सबसे ज़्यादा ठहाके लगे, वो थे रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव.

परमाणु समझौते के संबंध में उन्होंने कहा कि समन्वय समिति में वाम दलों के नेताओं के साथ बहस होते रही है. उन्होंने वाम दलों पर चुटकी लेते कहा कि वे कालिदास की तरह जिस डाली पर बैठे पर उसी को काट रहे हैं. उन्होंने सीपीएम के वर्तमान नेतृत्व से अपील की वे अपने बुज़ुर्ग नेता ज्योति बसु की बात को सुनें और बीजेपी से मिलकर सरकार का विरोध न करें.

लालू यादव ने कहा, "हाइड एक्ट भारत पर बाध्यकारी नहीं है. परमाणु समझौते से देश में मूलभूत सुविधाओं के विकास में बढ़ावा मिलेगा. भारतीय जनता पार्टी से पूछें कि अफ़ज़ल गुरु के गुरु अज़हर महमूद को किसने छुड़ाया, कौन उसे लेकर गया था?"

हंगामे और उसके बाद...

शाम को पूरी बहस में तब अफ़रा-तफ़री का माहौल छा गया जब बीच बहस में भाजपा के कुछ सांसदों ने एक बैग से नोटों की गड्डियाँ निकालकर सदन के सामने रख दीं और आरोप लगाया कि उन्हें यह पैसा कथित रूप से समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के नेताओं द्वारा दिया गया.

इसके बाद सदन की कार्यवाही कुछ देर के लिए स्थगित रही. शाम को साढ़े छह बजे फिर से सदन की कार्यवाही शुरू हुई.

 यूपीए सरकार ने सबसे ग़लत काम किया है कि अल्पमत में होने के बावजूद सरकार ने साम दाम दंड भेद का प्रयोग किया. जिस तरह से ख़रीद-फ़रोख्त की गई. मंत्रालय बांटे गए वो सही नहीं है
विजय कुमार मल्होत्रा

इस दौरान बोलते हुए जम्मू कश्मीर की पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता महबूबा मुफ़्ती ने कहा कि वो और उनकी पार्टी विश्वास प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री का समर्थन करती है.

उन्होंने कहा कि परमाणु क़रार या ऐसे किसी मुद्दे पर मुसलमान होने या भारतीय होने को अलग-अलग करके देखना ग़लत है.

वहीं नेशनल कांफ्रेंस के उमर अब्दुल्ला ने भी कड़े शब्दों में विपक्ष और वामदलों पर हमला करते हुए कहा कि वो इस परमाणु क़रार का समर्थन करते हैं.

उन्होंने कहा, "हमने एक बार एनडीए के साथ जाकर भूल की थी. गुजरात के दंगों के बाद भी इस्तीफा नहीं दिया था और इसके लिए आज भी दुख है पर अब ज़िंदगी में कभी सांप्रदायिक ताकतों का साथ नहीं देंगे."

उमर ने कहा कि वो फिरकापरस्त नहीं हैं, मस्जिद मंदिर नहीं गिराते हैं और अमरनाथ यात्रा का जहाँ तक सवाल है, वो तबतक जारी रहेगी जबतक जम्मू कश्मीर में मुसलमान हैं.

कुछ और वक्ताओं के बाद प्रधानमंत्री ने बोलना तो शुरू किया पर इतना ज़्यादा हंगामा हो रहा था कि उन्हें अपना भाषण लिखित में देना पड़ा.

भाजपा के तीखे आरोप

मंगलवार को बहस शुरुआत केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने की थी और फिर भारतीय जनता पार्टी के नेता विजय कुमार मल्होत्रा ने अपने भाषण में कहा कि यूपीए सरकार ने मतदान में जीतने के लिए 'दाग़ी सांसदों' का सहारा लिया.

इससे यूपीए नेता और जेल से आए सांसद ख़ासे नाराज़ हो गए. पप्पू यादव और कुछ अन्य सांसद अपनी सीट पर खड़े होकर नाराज़गी जताने लगे और शोरगुल के बीच सदन स्थगित करना पड़ा.

उन्होंने कहा, "यूपीए सरकार ने सबसे ग़लत काम किया है कि अल्पमत में होने के बावजूद सरकार ने साम दाम दंड भेद का प्रयोग किया. जिस तरह से ख़रीद-फ़रोख्त की गई. मंत्रालय बांटे गए वो सही नहीं है."

लक्ष्य पूरे हुए

लोकसभा में संख्या गणित
लोकसभा में विभिन्न छोटे दलों की अहमियत विश्वास मत के मद्देनज़र ख़ासी बढ़ गई है

वित्त मंत्री चिदंबरम ने कहा कि किसी भी सरकार ने किसानों के लिए उतना काम नहीं किया जितना यूपीए सरकार ने किया है. शाम तक इस पर मतदान होना की संभावना है.

वित्त मंत्री पी चिदंबरम का कहना था कि अमरीका के साथ 123 समझौते के मामले में सरकार ने सही फ़ैसला किया है और क़ानून के मुताबिक अगर कोई भ्रम की स्थिति पैदा होती है तो 123 समझौते को ही वैध माना जाएगा हाइड एक्ट को नहीं.

इस पर विपक्षी सांसदों ने आपत्ति की और शोर मचाया. चिदंबरम ने कहा कि अर्थव्यवस्था के मामले में बेहतरीन प्रगति हुई है और न्यूनतम साझा कार्यक्रम में तय किए गए लक्ष्य पूरे किए गए हैं.

वित्त मंत्री का कहना था कि सरकार ने परेशान किसानों का कर्ज़ माफ किया और उनके लिए राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना शुरु की.

उनका कहना था कि इससे तीन करोड़ से अधिक किसानों को फ़ायदा हुआ है. उन्होंने कहा, "हमारी सरकार से पहले भी किसानों की आत्महत्याएं हो रही थीं और हम इससे शर्मिंदा हैं लेकिन हमने इसे रोकने के लिए उपाय किए हैं और उनका कर्ज़ माफ़ किया है."

 हमारी सरकार से पहले भी किसानों की आत्महत्याएं हो रही थीं और हम इससे शर्मिंदा हैं लेकिन हमने इसे रोकने के लिए उपाय किए हैं और उनका कर्ज़ माफ़ किया है
पी चिदंबरम

चिदंबरम के भाषण के दौरान विपक्षी सांसदों ने विरोध किया और स्पीकर को बार बार हस्तक्षेप करना पडा और विपक्षी सांसदों से शांति बनाए रखने की अपील करनी पड़ी.

वित्त मंत्री ने ब्यौरेवार बताया कि पिछले चार वर्षों में अर्थव्यवस्था करीबन आठ प्रतिशत से अधिक की दर से बढ़ती रही है.

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के साथ वार्ताओं के बारे में चिदंबरम का कहना था कि भारत ने सिर्फ अमरीका के साथ समझौता नहीं किया है बल्कि यह समझौता कई अन्य देशों के साथ भी है जिसे लागू करने के लिए आईएईए और एनएसजी से वार्ताएं करना ज़रुरी था.

उन्होंने कहा कि अमरीका के साथ समझौते से भारत को परमाणु क्षेत्र में फायदा होगा. उनका कहना था कि 1974 और 1998 के बाद लगे प्रतिबंधों से जो हालात बने थे वो बदले हैं लेकिन इस समझौते से स्थितियां और बेहतर होंगी.

पालाबदल की आशंका

इससे पहले एक टीवी चैनल पर बहस में हिस्सा लेते हुए कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने आशंका जताई थी कि कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही पार्टियों के कुछ सांसद अपनी पार्टियों के ख़िलाफ़ वोट दे सकते हैं या अनुपस्थित रह सकते हैं.

उल्लेखनीय है कि बीजेपी के दो सांसदों ने स्पष्ट कर दिया है कि वो पार्टी के ख़िलाफ यानी यूपीए के समर्थन में वोट डालेंगे. पार्टी ने इन दोनों सांसदों की सदस्यता खारिज़ करने की मांग की है.

 मैं दिल्ली नहीं जा रही हूँ. मैं कांग्रेस के लिए वोट डाल सकती हूँ, न भाजपा के लिए और न ही सीपीएम के लिए
ममता बनर्जी

इसके अलावा समाजवादी पार्टी के कुछ सांसद पाला बदल सकते हैं और अभी यह कहना अत्यंत मुश्किल है कि कौन सांसद किसके पक्ष में जा रहा है.

तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने स्पष्ट कर दिया है कि वे मनमोहन सिंह सरकार के विश्वास प्रस्ताव पर मतदान के दौरान लोकसभा में मौजूद नहीं रहेंगी.

कोलकाता में एक रैली के दौरान ममता बनर्जी ने घोषणा की कि वो दिल्ली नहीं जाएँगी. उनका कहना था, " मैं दिल्ली नहीं जा रही हूँ. मैं कांग्रेस के लिए वोट डाल सकती हूँ, न भाजपा के लिए और न ही सीपीएम के लिए."

लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस की प्रतिनिधि सिर्फ़ ममता बनर्जी ही हैं यानी उनकी पार्टी के पास सिर्फ़ एक सीट है.

उल्लेखनीय है कि मौजूदा लोकसभा में प्रभावी सदस्य संख्या 541 है. दो सांसदों के स्थान खाली पड़े हैं, जबकि एक सांसद को मतदान का अधिकार नहीं है. सरकार को जीत के लिए 271 सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता पड़ेगी.

संसदलोकसभा में तीखी बहस
लोकसभा में यूपीए सरकार के विश्वास मत पर तीखी बहस...
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