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यूपीए सरकार ने 19 मतों से विश्वासमत जीता | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका से साथ हुए परमाणु समझौते को लेकर उपजे राजनीतिक विवाद के बाद वामपंथियों का समर्थन खो चुकी सरकार ने आख़िर विश्वासमत जीत लिया है. लोकसभा के विशेष सत्र में दो दिनों तक चली बहस के बाद हुए मतदान में यूपीए ने 256 के मुक़ाबले 275 मतों से जीत हासिल की. वर्तमान संसद में बहुमत के लिए सरकार को 271 सदस्यों के समर्थन की ज़रुरत थी लेकिन सरकार ने इससे चार अधिक सांसदों का मत हासिल किया है. दस सांसदों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया. मतदान के पहले तक विश्वासमत के दौरान अनुपस्थित रहने के लिए सांसदों की ख़रीदफ़रोख़्त के आरोप प्रत्यारोपों को लेकर सदन में ज़ोरदार हंगामा होता रहा. उल्लेखनीय है कि मतदान के कुछ ही घंटों पहले भारतीय जनता पार्टी के सांसद नोटों से भरा एक थैला लेकर सदन के भीतर आ गए और फिर नोट दिखाते हुए उन्होंने सत्तारूढ़ गठबंधन पर मतदान में अनुपस्थित रहने के लिए यह पैसा देने का आरोप लगाया. लोकसभा टेलीविज़न चैनल पर दिखाए गए इन दृश्यों के बाद संसद की कार्रवाई कई बार बाधित हुई और फिर लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने इस मामले की जाँच का आश्वासन दिया है.
विपक्ष के सांसद सदन में विशेष सत्र के पहले दिन से ही आरोप लगा रहे थे कि सौदेबाज़ी और सांसदों की ख़रीद हो रही है. अंक गणित लोकसभा में 543 सदस्य होते हैं लेकिन इस समय इसमें से दो सीटें खाली हैं और सदस्यों की कुल संख्या 541 है. ऐसे में बहुमत के लिए सरकार को 271 सदस्यों का समर्थन चाहिए था. 224 सदस्यों वाली यूपीए पिछले चार साल से वामपंथियों के 59 सांसदों के समर्थन पर चल रही थी. लेकिन यूपीए सरकार के आईएईए में जाने के फ़ैसले के ख़िलाफ़ गत आठ जुलाई को वामपंथियों ने समर्थन वापसी की घोषणा कर दी और सरकार अल्पमत में आ गई थी. इसके बाद यूपीए ने समर्थन जुटाने की क़वायद शुरु की और सबसे पहले उसे समाजवादी पार्टी का समर्थन मिला. समाजवादी पार्टी के पास 39 सांसद हैं. हालांकि यह आख़िरी समय तक कयास लगाए जाते रहे कि इनमें से कितने सांसदों का समर्थन यूपीए को मिल सकेगा. यूपीए ने पाँच सांसदों वाले झारखंड मुक्ति मोर्चा को तो मना लिया था और दो सांसदों वाली नेशनल कांफ़्रेंस ने भी सरकार को समर्थन देने की घोषणा कर दी थी. लेकिन बहुजन समाज पार्टी से लेकर अजित सिंह के लोकदल का समर्थन सरकार हासिल नहीं कर सकी थी.
और आख़िर तक निर्दलियों और एक-एक सांसद वाली छोटी पार्टियों पर निर्भर कर रही थी और लगता है उसे इसमें सफलता भी मिली. बहस प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को संक्षिप्त भाषण में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार की चार साल और दो महीने के काम पर वोट माँगा और बहस की शुरुआत की. जहाँ विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने सरकार पर तीखे प्रहार किए वहीं वामपंथी दलों की ओर से मोहम्मद सलीम ने आरोप लगाया कि सरकार ने वामपंथी दलों और देश को धोखा दिया है. विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने सरकार का बचाव करते हुए भाजपा और वामपंथी पार्टियों के आरोपों को ख़ारिज कर दिया. दो दिनों की बहस में उठाए गए सवालों का जवाब देने के लिए खड़े हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने जवाब नहीं देने दिया. भाजपा के सदस्य प्रधानमंत्री से इस्तीफ़े की माँग करते हुए नारे लगा रहे थे. इसके बाद प्रधानमंत्री ने अपना जवाब सदन के पटल पर रख दिया. |
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