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कांग्रेस का जहाज़ डूब रहा है: कारत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राजनीति में राजनीतिक समीकरण किस तरह बदलते हैं, इसका ताज़ा उदाहरण सीपीएम महासचिव प्रकाश कारत के बयान से तो मिल ही जाता है. प्रकाश कारत ने कांग्रेस को एक 'डूबता हुआ जहाज़' क़रार दिया है. कारत ने तो अपने पुराने यूपीए के साथियों को ये सुझाव दे डाला, " जितनी जल्दी हो वो इस डूबते हुए जहाज़ से कूद जाएँ और सांप्रदायिक ताकतों के ख़िलाफ़ एकजुट होने के लिए वामपंथियों के साथ हाथ मिला लें." उनका कहना था, "हम कांग्रेस और भाजपा के ख़िलाफ़ एक नई टीम खड़ी कर सकते हैं." कारत ने चेन्नई में कांग्रेस पर जमकर हमले बोले. कारत ने कहा कि कांग्रेस 22 जुलाई को होने वाले विश्वास मत पर सरकार को बचाने के लिए 'कुछ अवसरवादी ताकतों' से हाथ मिला रही है. कारत ने कहा कि कांग्रेस को इसके लिए अगले आम चुनाव में कीमत चुकानी पड़ेगी. उनका कहना था,"लोग कांग्रेस को न सिर्फ़ सज़ा देंगे बल्कि, अवसरवादी ताकतों के साथ हाथ मिलाकर न्यूनतम साझा कार्यक्रम के मामले में धोखा देने के लिए भी पूछेंगे." चेन्नई में वामपंथी दलों की आमसभा में कारत ने भारत-अमरीका परमाणु क़रार के मामले में सरकार से समर्थन वापस लेने की कारणों को स्पष्ट किया. प्रकाश कारत ने कहा कि अगर सरकार विश्वासमत हासिल करने में कामयाब हो भी जाती है तो वामपंथी दल, परमाणु क़रार के विरोध का अपना आंदोलन इसी तरह जारी रखेंगे. सपा भी निशाने पर कारत ने उन पार्टियों की भी जमकर आलोचना की जो कभी परमाणु क़रार का विरोध करती थीं लेकिन अब वो कांग्रेस का समर्थन कर रही हैं. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह का नाम लिए बिना कारत ने कहा, " ये पहले भारत-अमरीका परमाणु क़रार को देश की सबसे बड़ी आपदा बता रहे थे. लेकिन अब रातों-रात इन्हें क़रार में फ़ायदा नज़र आने लगा है." गौरतलब है कि क़रार के मामले में वामदलों के सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी से हाथ मिलाकर परमाणु क़रार पर आगे बढ़ने का फ़ैसला किया है. लेकिन सरकार को 22 जुलाई को संसद में विश्वासमत साबित करना है. कारत ने कहा कि कांग्रेस की नीतियाँ भी अब अमरीका-समर्थित हो चुकी हैं. |
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