|
अंबानी बंधुओं को लेकर सियासत तेज़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उद्योगपति मुकेश अंबानी से प्रधानमंत्री की मुलाक़ात को लेकर राजनीति विवाद तेज़ होता दिख रहा है. प्रधानमंत्री कार्यालय ने इन अटकलों को ग़लत ठहराया है कि मुकेश अंबानी और मनमोहन सिंह की मुलाक़ात का समाजवादी पार्टी से मिलने वाले समर्थन से कोई ताल्लुक़ है. प्रधानमंत्री के दफ़्तर से जारी किए गए बयान में कहा गया है कि "प्रधानमंत्री अक्सर उद्योपतियों से मिलते रहते हैं, इस बैठक को राजनीतिक रंग देना सही नहीं है. प्रधानमंत्री के पास कार्पोरेट प्रतिद्वंद्विता के झगड़े सुलझाने के लिए कोई समय नहीं है". अटकलें लगाई जा रही हैं कि समाजवादी पार्टी के निकट समझे जाने वाले उद्योगपति अनिल अंबानी को इस राजनीतिक समर्थन का व्यापारिक लाभ मिल सकता है, यही वजह है कि उनके बड़े भाई अपनी चिंता लेकर प्रधानमंत्री से मिले थे. समाजवादी पार्टी के महासचिव अमर सिंह ने इन अटकलों को बेबुनियाद बताया है कि कांग्रेस को समर्थन देने के बदले वे अपने उद्योगपति मित्र अनिल अंबानी के लिए आर्थिक लाभ लेना चाहते हैं. इससे पहले सरकार से समर्थन वापस ले चुकी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) ने मुकेश अंबानी और प्रधानमंत्री की मुलाक़ात पर कड़ा एतराज़ जताया है, पार्टी की वेबसाइट पर एक बयान प्रकाशित किया गया है जिसमें कहा गया है कि "प्रधानमंत्री कार्यालय व्यावसायिक झगड़े सुलझाने का केंद्र नहीं बनना चाहिए". सीपीएम का कहना है कि व्यावसायिक घराने 22 जुलाई के विश्वास मत में खुलेआम बड़ी भूमिका निभा रहे हैं. सीपीएम की ओर से जारी बयान में कहा गया है, "समाजवादी पार्टी ने अनिल और मुकेश अंबानी के बीच के झगड़े को सुलझाने के लिए सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय से हस्तक्षेप की बात करके एक ख़तरनाक परिपाटी की शुरूआत कर दी है." समाजवादी पार्टी के महासचिव ने प्रधानमंत्री से कहा था कि अंबानी बंधुओं का आपसी झगड़ा सुलझाया जाना चाहिए क्योंकि उसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. टैक्स मुकेश अंबानी ऐसे वक़्त पर प्रधानमंत्री से मिले हैं जबकि मीडिया में ऐसी ख़बरों की भरमार है कि मुकेश और अनिल अंबानी दोनों ने विश्वास मत को प्रभावित करने के लिए सांसदों की ख़रीद-फ़रोख्त के लिए अपनी झोलियाँ खोल दी हैं. कार्पोरेट जगत के जानकारों का मानना है कि समाजवादी पार्टी से अनिल अंबानी की निकटता मुकेश अंबानी में असुरक्षा की भावना पैदा कर रही है इसलिए वे नहीं चाहते कि विश्वास मत हासिल करने के बाद सरकार अनिल अंबानी को कोई फायदा या उन्हें नुक़सान पहुँचा सके. मुकेश अंबानी के ख़ेमे में हलचल की असली वजह अमर सिंह की यह माँग बताई जा रही है कि तेल कंपनियों की ताज़ा मोटी कमाई को देखते हुए उन पर अधिक टैक्स लगना चाहिए. समाचार एजेंसियों पर ऐसी रिपोर्ट आई थी कि प्रधानमंत्री के साथ मुलाक़ात में अमर सिंह ने निजी पेट्रोलियम कंपनियों पर अधिक कर लगाने की वक़ालत की थी. यहाँ ग़ौर करने की बात ये है कि अनिल अंबानी के बड़े भाई रिलायंस पेट्रोकेमिकल्स के मालिक हैं और इस तरह के टैक्स लगने से उन पर बुरा असर पड़ेगा. |
इससे जुड़ी ख़बरें 'यूपीए सरकार पारदर्शी नहीं, संघर्ष जारी रहेगा'09 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस विश्वास मत के लिए विशेष सत्र11 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस बहुमत साबित करने में सफल होंगे: सोनिया11 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस बहुमत साबित करने की कवायद तेज़10 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस 'देश के लिए बुश से बड़ा ख़तरा आडवाणी'06 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||