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हमले में पाकिस्तान का हाथ नहीं:गिलानी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने इस बात का खंडन किया है कि काबुल स्थित भारतीय दूतावास पर हुए हमले में उनके देश का हाथ था. कुआलालंपुर में एक बैठक में शामिल होने पहुँचे गिलानी ने पत्रकारों से कहा, "पाकिस्तान अफ़ग़ानिस्तान में अस्थिरता क्यों फैलाएगा? अफ़ग़ानिस्तान में शांति हमारे हक़ में है. हम क्षेत्र में स्थिरता चाहते हैं." अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल स्थित भारतीय दूतावास पर हुए आत्मघाती हमले की जाँच शुरु हो गई है. सोमवार को हुए इस हमलें में चार भारतीय समेत 41 लोग मारे गए थे. इस बीच तालेबान लड़ाकों ने हमले में हाथ होने से इनकार किया है. पेशावर स्थित बीबीसी संवाददाता रहीमुल्ला यूसुफ़ज़ई का कहना है अफ़ग़ानिस्तान के कुछ अधिकारियों ने हमले में पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई का हाथ होने की आशंका जताई है. हालाँकि यूसुफ़ रज़ा गिलानी के बयान से पहेल ही पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा है कि वह इस तरह के अनर्गल बयान की निंदा करते हैं. अफ़ग़ानिस्तानी अधिकारी इससे पहले हुए कई हमलों के लिए भी आईएसआई को ज़िम्मेदार ठहरा चुके हैं. भारतीय दूतावास पर हुए हमले के बारे में भी यही कहा जा रहा है कि तालेबान ने आईएसआई की मदद से बम विस्फोट किया. लेकिन आम तौर पर इस तरह के हमलों की ज़िम्मेदारी लेने वाला तालेबान इस बार हमले में हाथ होने से इनकार कर रहा है. इससे पहले 27 अप्रैल को राष्ट्रीय परेड के दौरान हुए धमाके और सरीना होटल में हुए बम विस्फोट की ज़िम्मेदारी तालेबान ने ली थी. हमले की निंदा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने भारतीय दूतावास पर हुए आत्मघाती हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है.
इसमें भारतीय सेना के एक ब्रिगेडयर और भारतीय विदेश सेवा के एक अधिकारी समेत चार लोग मारे गए थे. अफ़ग़ानिस्तान के सरकारी अधिकारियों के मुताबिक विस्फोटकों से भरी हुई एक कार को आत्मघाती हमलावर ने भारतीय दूतावास के गेट पर दे मारा. इससे एक भीषण विस्फोट हुआ और बड़ी तादाद में लोग इसमें हताहत हो गए. किसी भारतीय दूतावास पर हुआ यह शायद पहला हमला था. इस हमले की दुनिया के कई देशों की ओर से कड़ी निंदा की गई है. दिल्ली स्थित अमरीकी दूतावास से जारी बयान में इस हमले पर अफ़सोस जाहिर किया गया. अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने कहा कि हमलावर भारत और अफ़ग़ानिस्तान के बेहतरीन रिश्तों में दरार पैदा करना चाहते थे. यूरोपीय संघ ने भी कड़े शब्दों में इस आत्मघाती हमले की भर्त्सना की है. भारत की ओऱ से एक दल हमले के बाद की स्थितियों और सुरक्षा इंतज़ामों की समीक्षा के लिए रवाना कर दिया गया है. हालांकि विदेशमंत्री ने कहा कि इस हमले के बाद भी भारत की ओर से अफ़ग़ानिस्तान को मिल रही मदद का क्रम जारी ही रहेगा. | इससे जुड़ी ख़बरें भारतीय दूतावास पर हमले की कड़ी निंदा07 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस हमले की निंदा, भाजपा ने सवाल उठाए07 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस धमाके में चार भारतीयों समेत 41 मारे गए07 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस अमरीकी हेलीकॉप्टर को मार गिराया02 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस हमले में बाल-बाल बचे राष्ट्रपति करज़ई27 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस काबुल में कार बम फटा, छह मरे13 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस कंधार में धमाका, दस से ज़्यादा मरे17 फ़रवरी, 2008 | भारत और पड़ोस अफ़ग़ानिस्तान ने नए दूत का विरोध किया27 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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