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'क़रार पर जल्द ही आईएईए में जाएंगे' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जी-8 सम्मेलन के लिए जापान की यात्रा पर गए भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि केंद्र सरकार जल्द ही परमाणु क़रार के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी आईएईए के पास जाएगी. यानी प्रधानमंत्री ने सीधे सपाट शब्दों में कह दिया है कि वामदलों की चेतावनी के आगे यूपीए सरकार झुकने वाली नहीं है और परमाणु क़रार पर आगे बढ़ने के अपने फ़ैसले पर अडिग है. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर सरकार को किसी भी तरह का ख़तरा नहीं है और वामदलों के समर्थन वापस लेने की स्थिति में अगर बहुमत साबित करने की ज़रूरत पड़ी तो सरकार के पास उसके लिए पर्याप्त संसाधन हैं. उन्होंने कहा, "हमें आश्वस्त किया गया है कि हम जैसी ही क़रार को लेकर आईएईए में जाएंगे, इसपर आगे की प्रक्रिया को तेज़ी से पूरा किया जाएगा." प्रधानमंत्री के इस वक्तव्य पर वामदलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि प्रधानमंत्री ने ऐसा कहकर साबित कर दिया है कि उनमें लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के प्रति कोई आदर नहीं बचा है. हालांकि इस दौरान प्रधानमंत्री वामदलों के प्रति बहुत संयत और सुलझकर बोलते हुए नज़र आए.
उन्होंने किसी भी तीखी टिप्पणी से बचते हुए कहा, "वामदल हमारे लिए बहुत अहम सहयोगी है. यह दुर्भाग्यपूर्ण ज़रूर है कि परमाणु क़रार के मुद्दे पर हम एकमत नहीं हैं पर मुझे अभी भी आशा है कि कोई रास्ता निकल पाएगा." प्रधानमंत्री की ओर से परमाणु क़रार पर केंद्र सरकार के रुख़ को लेकर ताज़ा बयान ऐसे वक्त में आया है जब केंद्र की यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामदल स्पष्ट तौर पर चेतावनी दे चुके हैं कि अगर अमरीका के साथ क़रार पर सरकार आगे बढ़ी तो वे अपना समर्थन वापस ले लेंगे. लक्ष्मण रेखा पार इस बारे में वामदलों की ओर से भारतीय विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी को एक पत्र लिखकर सरकार की राय स्पष्ट करने की माँग की गई थी और इसके लिए सात जुलाई तक की समयसीमा भी निर्धारित की गई थी. यह समयसीमा सोमवार की शाम के साथ ही समाप्त हो गई. विदेशमंत्री ने जवाब लिखा और कहा कि 10 जुलाई को इस गतिरोध पर बैठक की जाएगी पर उधर प्रधानमंत्री ने वामदलों की चेतावनी को दरकिनार करके समझौते पर आगे बढ़ने का साफ़ संकेत दे दिया है.
यानी ताज़ा राजनीतिक स्थितियों में वामदलों के पास केंद्र सरकार से समर्थन वापस लेने के सिवाय और कोई विकल्प बचता नज़र नहीं आता. प्रधानमंत्री के बयान के बाद प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सीपीआई महासचिव डी राजा ने कहा, "हमें विदेशमंत्री की ओर से बातचीत का प्रस्ताव मिला पर प्रधानमंत्री के बयान के बाद क्या इसकी कोई गुंजाइश रह जाती है." दरअसल, वामदल लगातार यह आरोप लगाते रहे हैं कि ताज़ा रूप में अगर अमरीका के साथ परमाणु क़रार होता है तो इससे देश की संप्रभुता को ख़तरा पैदा हो सकता है. वामदलों का आरोप है कि इससे देश की निर्पेक्ष और निर्गुट विदेश नीति भी इस क़रार से भंग हो जाएगी. पर मनमोहन सिंह ने जापान में हो रहे जी-8 सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए अपनी यात्रा के दौरान दोहराया है कि अगर क़रार का विरोध कर रहे लोग ध्यान से इस क़रार में निहित बातों को पढ़ें तो उनकी धारणा इसके बारे में बदलेगी. प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी तरह से यह क़रार भारत की संप्रभुता को प्रभावित नहीं करता और यह क़रार पूरी तरह से भारत के पक्ष में है.
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