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सरकार पर दबाव डालेंगे: आडवाणी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि यदि परमाणु समझौते के मुद्दे पर वामपंथी दल केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार से समर्थन वापस ले लेते हैं तो पार्टी सरकार से लोक सभा में विश्वास मत हासिल करने को कहेगी. भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने रविवार को कहा, " यदि वामपंथी दल समर्थन वापस ले लेते हैं तो हम विश्वास मत हासिल करने के लिए सरकार पर दबाव डालेंगे." आडवाणी ने उड़ीसा के राउलकेला में आयोजित एक सभा में ये बात कही. भाजपा नेता का कहना था कि वामपंथी दलों द्वारा समर्थन वापस ले लिए जाने के बाद सरकार को बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं होगा, ऐसी स्थिति में विश्वास मत हासिल करना ज़रूरी हो जाएगा. उनका कहना था कि भारत को अमरीका के साथ समझौता करके अपने परमाणु कार्यक्रम और पोखरण जैसे परमाणु परीक्षणों की बलि नहीं देनी चाहिए. प्रेक्षकों का कहना है कि हालांकि आम चुनाव अपने निर्धारित समय के अनुसार अगले वर्ष होने हैं, लेकिन अटकलें लगाई जा रही हैं कि चुनाव पहले भी हो सकते हैं. ग़ौरतलब है कि सीपीएम ने रविवार को पोलित ब्यूरो की दिल्ली में आयोजित बैठक के बाद स्पष्ट कह दिया था कि सरकार ने अगर परमाणु समझौते पर आगे बढ़ने की ग़लती की तो समर्थन वापस ले लिया जाएगा. सीपीएम महासचिव प्रकाश कारत ने बैठक के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए ये स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी दूसरे वामपंथी दलों के साथ बात करके ही सरकार से समर्थन वापस लेगी. |
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