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शुक्रवार, 06 जून, 2008 को 12:43 GMT तक के समाचार
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उमर अब्दुल्लाह नज़र आएंगे फ़िल्म में

फ़ारूक़ अब्दुल्लाह और उमर अब्दुल्लाह
फ़ारूक़ अब्दुल्लाह के बाद नेशनल कान्फ्रेंस की बागडोर उमर अब्दुल्लाह ने संभाली थी
जुलाई में भारत के सिनेमाघरों में एक फ़िल्म दिखाई जाएगी जिसका नाम है - मिशन इस्तांबूल. आप समझ सकते हैं कि इसमें ख़ास क्या बात है, हर महीने बहुत सी फ़िल्में सिनेमाघरों में दिखाई जाती हैं.

ख़ास बात ये है कि इस फ़िल्म में भारत प्रशासित कश्मीर के नेता उमर अब्दुल्लाह भी नज़र आएंगे. उमर अब्दुल्लाह नेशनल कान्फ्रेंस के मौजूदा अध्यक्ष हैं.

वह पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारूक़ अब्दुल्लाह के बेटे और कश्मीर में एक बड़ा नाम माने जाने वाले शेख़ अब्दुल्लाह के पोते हैं. उमर अब्दुल्लाह केंद्र में मंत्री भी रह चुके हैं.

मिशन कश्मीर की ही तरह मिशन इस्तांबूल भी आतंकवाद के बारे में एक फ़िल्म है. मिशन इस्तांबूल में ख़ुद उमर अब्दुल्लाह एक विशेष भूमिका में नज़र आते हैं.

यह भूमिका कोई अभिनय की तो नहीं है मगर फ़िल्म में अभिनेत्री ने कश्मीर की स्थिति और मीडिया की भूमिका के बारे में उमर अब्दुल्लाह का इंटरव्यू किया है.

उमर अब्दुल्लाह इस इंटरव्यू में कश्मीर की स्थिति के बारे में मीडिया की भूमिका की आलोचना करते नज़र आते हैं, "कश्मीर में अच्छी बातों को मीडिया ख़बरें नहीं बनाता है. जब तक कोई बम धमाका ना हो, कोई मारा ना जाए, तब तक यहाँ कोई ख़बर नहीं बनती है."

उमर अब्दुल्लाह कहते हैं, "कश्मीर में इतनी सारी अच्छी बातें हो रही हैं मसलन, बहुत से सैलानी आ रहे हैं, लेकिन यह सबकुछ मीडिया में उस तरह से जगह नहीं पाता है जैसा कि हिंसक घटनाओं को ख़ूब ज़ोरशोर से रिपोर्ट किया जाता है."

'राजनीति से फ़िल्में'

अलबत्ता उमर अब्दुल्लाह ये डायलॉग स्क्रिप्ट से बोलते हैं लेकिन उनका कहना है कि जो कुछ भी उन्होंने इस फ़िल्म में कहा है वह उनका ख़ुद का अनुभव भी है.

एक ही बात कई बार...
 वह जो ख़ुद समझते और सोचते हैं वही बोलते हैं लेकिन फ़िल्म में उन्होंने यह बात स्क्रिप्ट देखकर कही है और वो भी अलग-अलग अंदाज़ से. एक ही बात को कई बार कहना पड़ा.
उमर अब्दुल्लाह

हालाँकि पटकथा को देखकर डॉयलॉग बोलते हुए उन्हें कुछ अटपटा लगा और उनका कहना है, "वह जो ख़ुद समझते और सोचते हैं वही बोलते हैं लेकिन फ़िल्म में उन्होंने यह बात स्क्रिप्ट देखकर कही है और वो भी अलग-अलग अंदाज़ से. एक ही बात को कई बार कहना पड़ा."

उमर अब्दुल्लाह ने बताया कि उन्हें क़रीब एक सप्ताह पहले स्क्रिप्ट दे दी गई थी और उसे ज़ुबानी याद करने के लिए कहा गया था.

उमर अब्दुल्लाह के लिए मीडिया को इंटरव्यू देना एक आम बात है लेकिन फ़िल्म में यह इंटरव्यू देने के लिए उन्हें कुछ रीटेक करने पड़े यानी एक ही दृश्य को कई बार दोहराना पड़ा.

उमर अब्दुल्लाह को उस अभिनेत्री का नाम तो याद नहीं है जिन्होंने फ़िल्म में उनका इंटरव्यू किया है लेकिन फ़िल्म में विवेक ओबेरॉय और ज़ायद ख़ान जैसे अभिनेताओं ने काम किया है.

उमर अब्दुल्लाह का इंटरव्यू इस फ़िल्म में राजस्थान की राजधानी जयपुर के एक बाग में दर्शाया गया है. हालाँकि उमर अब्दुल्लाह ने यह फ़रमाइश रखी थी कि यह इंटरव्यू कश्मीर में उनके घर में होना चाहिए था लेकिन इतनी बड़ी फ़िल्म यूनिट को वहाँ नहीं ले जाया जा सकता था.

उमर कहते हैं कि उन्होंने अपने स्कूल के एक साथी की गुज़ारिश पर इस फ़िल्म में यह इंटरव्यू दिया है, वैसे उनका राजनीति छोड़कर फ़िल्मी दुनिया में जाने का कोई इरादा नहीं है.

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