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मंगलवार, 03 जून, 2008 को 10:47 GMT तक के समाचार
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'शिवाजी' देंगे 'लिबर्टी' को टक्कर
शिवाजी(फ़ाइल)
मरीन ड्राइव से एक किलोमीटर की दूरी पर लगाई जाएगी शिवाजी की प्रतिमा
दुनिया भर में अमरीका की पहचान के रूप में मशहूर ‘स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी’ की तरह ही जल्द ही आप भारत या महाराष्ट्र की पहचान के तौर पर ‘स्टेच्यू ऑफ शिवाजी’ यानी शिवाजी की प्रतिमा को देख सकेंगे.

महाराष्ट्र की काँग्रेस-एनसीपी सरकार ने अरब सागर में मुंबई के ‘मरीन ड्राइव’ से थोड़ी दूरी पर शिवाजी की प्रतिमा बिल्कुल उसी तरह लगाने का फ़ैसला किया है जिस तरह से अमरीका में स्टेच्यू ऑफ़ लिबर्टी है.

शिवाजी की प्रतिमा की ऊँचाई लगभग उतनी ही होगी जितनी स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी’ की है. स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी’ 309 फ़ीट ऊँची है.

शिवाजी की ये मूर्ति भारत की अब तक की सबसे बड़ी प्रतिमा होगी.

महाराष्ट्र में मराठियों के हितों की बात करने वाली पार्टियाँ शिव सेना और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना लगातार ये माँग करती आ रही थीं कि काँग्रेस और एनसीपी ने मराठियों के लिए कुछ नहीं किया.

महंगी परियोजना

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख और उपमुख्यमंत्री आरआर पाटिल ने उस जगह का दौरा भी किया है जहाँ ये प्रतिमा स्थापित की जानी है.

इसकी लागत करीब 45 लाख डॉलर बताई जा रही है. इस प्रतिमा में शिवाजी घोड़े पर बैठे दिखाई देंगे.

लिबर्टी की मूर्ति
स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी अमरीका की पहचान है

शिवाजी की इस प्रतिमा के स्थापित हो जाने के बाद इसका शुमार दुनिया की सबसे ऊँची प्रतिमाओं में हो जाएगा.

वैसे दुनिया भर में सबसे ज़्यादा ऊँची प्रतिमाओं में गौतम बुद्ध की प्रतिमाएँ ही शामिल हैं. जो कि पूर्वी देशों में हैं.

कई अड़चनें भी हैं

वैसे इस प्रतिमा को स्थापित होने में अभी दो साल तक का समय लग सकता है. अभी इस परियोजना को पर्यावरण विभाग की मंज़ूरी भी मिलनी बाक़ी है.

दरअसल, 2004 में काँग्रेस-एनसीपी गठबंधन ने इसे अपने चुनावी वादे के तौर पर पेश किया था.

इससे पहले शिवाजी की प्रतिमा को मुंबई के पूर्वी तट पर स्थित ऑयस्टर रॉक्स पर स्थापित किए जाने के लिए इजाज़त मांगी गई थी लेकिन भारतीय नौसेना ने इसे मंज़ूरी नहीं दी थी.

इसके बाद इसे क्रॉस द्वीप पर लगवाने की कोशिश की गई लेकिन मुंबई पोर्ट ट्रस्ट ने इससे इनकार कर दिया.

प्रतिमा

अब इसे मरीन ड्राइव से एक किलोमीटर दूर स्थापित करने की कोशिश की जा रही है.

राज्य सरकार की योजना है कि मरीन ड्राइव तट से एक किलोमीटर की दूरी पर साढ़े सात एकड़ का एक कृत्रिम द्वीप तैयार कराया जाए और उसके ऊपर इस प्रतिमा को स्थापित करवाया जाए.

इस कृत्रिम द्वीप पर सैलानियों को आकर्षित करने के लिए यहाँ शिवाजी का एक संग्रहालय भी बनवाने की योजना है.

महाराष्ट्र सरकार यहाँ एक लाइब्रेरी और एक बाग भी तैयार करवाना चाहती है.

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