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गूजर अंतिम संस्कार के लिए राज़ी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राजस्थान में पिछले 12 दिनों से मृतक गूजरों का शव लेकर आंदोलन कर रहे परिजन अब उनका अंतिम संस्कार करने के लिए राज़ी हो गए हैं. सोमवार को पीलूपुरा में जिन 16 शवों का पोस्टमार्टम किया गया था, उनमें से 12 शवों को परिजन अपने गाँव अंतिम संस्कार के लिए ले जा रहे हैं. राज्य में अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने की माँग कर रहे गूजरों का आंदोलन हालांकि 12 दिन बाद भी थमा नहीं है. इस आंलोदन के दौरान भड़की हिंसा और पुलिस फ़ायरिंग में 39 लोगों की मौत हो चुकी है. सोमवार को 10 दिन पहले पुलिस फ़ायरिंग में मारे गए गूजरों के 16 शवों का पोस्टमार्टम पीलूपुरा में ख़त्म हो गया था पर गूजरों का प्रदर्शन अब भी जारी है. एक शव का पोस्टमार्टम दो दिन पहले ही जयपुर में कर दिया गया था पर अब गूजर माँग कर रहे हैं कि इस शव का पोस्टमार्टम दोबारा उनकी देखरेख में हो. मंगलवार को 20 और शवों का पोस्टमार्टम किया जा रहा है. इनमें से 18 शवों का पोस्टमार्टम सिकंदरा में किया जाएगा और दो अन्य शवों का सवाई माधोपुर में. मंगलवार को ही गूजर समाज की माँग के अनुरूप उन्हें पीलूपुरा में सोमवार को हुए पोस्टमार्टमों की रिपोर्ट उन्हें सौंप दी जाएगी. पहले गूजर समाज में यह असमंजस बना हुआ था कि पोस्टमार्टम के बाद शवों का अंतिम संस्कार वहीं किया जाए जहाँ हिंसा की घटना हुई थी या पारंपरिक तरीके से गाँवों में अंतिम संस्कार हो. कुछ लोगों को ऐसा भी लग रहा था कि पोस्टमार्टम के बाद यदि शवों का अंतिम संस्कार कर दिया जाएगा तो इससे आंदोलन बिखरना शुरू हो जाएगा या कमज़ोर पड़ेगा. पर सोमवार की रात और फिर मंगलवार को दिन में इस बारे में गूजर समाज के लोगों ने बैठकर बातचीत की और पारंपरिक तरीके से पैतृक गाँवों में ही अंतिम संस्कार करने की सहमति बनी है. आंदोलन जारी उधर दिल्ली-जयपुर रेलमार्ग पर गूजरों का प्रदर्शन अभी भी जारी है जिसकी वजह से पिछले दो दिनों के दौरान क़रीब 40 रेलगाड़ियों को रद्द करना पड़ा है. रेल विभाग को लाखों रूपए का किराया यात्रियों को वापस लौटाना पड़ा है. हज़ारों की तादाद में यात्री रेल यातायात के ठप्प होने से प्रभावित हुए हैं.
सोमवार को तो स्थिति इतनी विकट हो गई थी कि रेल यातायात से प्रभावित लोगों को आवागमन की सुविधा मुहैया कराने के लिए राज्य परिवहन निगम को 170 बसों की अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ी. आंदोलन के दौरान 39 लोगों की मौत की वजह से चौतरफ़ा निंदा झेल रही राज्य सरकार अब प्रदर्शनकारियों के साथ कोई कड़ाई नहीं बरतनी चाहती और पुलिस इससे बच रही है. जहाँ गूजरों ने अपना आंदोलन जारी रखा है वहीं भाजपा के एक सांसद के खुलकर मुख्यमंत्री के विरोध में सामने आने से मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की मुश्किलें बढ़ती नज़र आ रही हैं. भरतपुर के विधायक विजय बंसल के हाथों दिव्या सिंह, जो कि गूजर बिरादरी से हैं और राज्य की डीग विधानसभा सीट से विधायक हैं, सोमवार को अपना इस्तीफ़ा गूजर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला को भिजवा दिया था. उल्लेखनीय है कि दिव्या सिंह राज्य की भरतपुर संसदीय सीट से भारतीय जनता पार्टी के सांसद विश्वेंद्र सिंह की पत्नी हैं. राज्य की भरतपुर संसदीय सीट से भारतीय जनता पार्टी के सांसद विश्वेंद्र सिंह ने सोमवार को राज्य के सभी गूजर विधायकों और मंत्रियों से अपने-अपने इस्तीफ़े देने की अपील की थी. उन्होंने अपील करते हुए कहा था कि जिन लोगों ने राज्य में बिरादरी की मदद से कुर्सी पाई है वे बिरादरी के लिए कुर्सी छोड़ने को भी तैयार हों. |
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