|
राजस्थान के पुलिस प्रमुख की 'छुट्टी' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राजस्थान के पुलिस महानिदेशक अमरजोत सिंह गिल को लंबी छुट्टी पर भेज दिया गया है लेकिन आंदोलनकारी गूजरों और राज्य सरकार के बीच किसी तरह की सहमति नहीं बन पाई है. राज्य सरकार ने एएस गिल की जगह पर केएस बेंस को पुलिस महानिदेशक की ज़िम्मेदारी सौंपी है. उन्हें कुछ दिन पहले ही ख़ुफ़िया विभाग का महानिदेशक बनाया गया था. एएस गिल ने शुक्रवार को मुख्य सचिव के साथ गूजर आंदोलन से प्रभावित इलाक़ों का दौरा किया था लेकिन फिर भी हिंसा हुई और सवाई माधोपुर में पुलिस फ़ायरिंग में दो लोग मारे गए. इसके बाद सरकार ने दबाव में उन्हें हटाने का फ़ैसला किया. माना जा रहा है कि एएस गिल आंदोलन से निपटने के सरकारी तरीकों से खुश नहीं थे. उनके हवाले से ऐसी ख़बर भी आई कि राज्य सरकार ने उन्हें गूजर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला को गिरफ़्तार करने के आदेश ही नहीं दिए. पोस्ट मॉर्टम की पेशकश इस बीच राज्य सरकार ने पुलिस फ़ायरिंग में मारे गए लोगों के शवों का पोस्टमॉर्टम अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली के डॉक्टरों से कराने की पेशकश की है जिस पर गूजर नेताओं की ओर से जवाब नहीं आया है.
जयपुर के सवाई मान सिंह अस्पताल में रखे गए शवों के बारे में एक आधिकारिक सार्वजनिक सूचना जारी की गई है. इसमें कहा गया है कि मृतकों के परिजन अभी तक शवों को लाने नहीं पहुँचे हैं और एक हफ़्ते में इन शवों का हलत बिगड़ चुकी है. सूचना में कहा गया है कि अगर शनिवार तक शवों को लेने कोई नहीं पहुँचा तो क़ानूनी प्रक्रिया के मुताबिक पुलिस इनका अंतिम संस्कार कर देगी. गूजर नेताओं ने शवों का पोस्ट मॉर्टम राज्य के बाहर के डॉक्टरों से कराने की माँग रखी थी. आरक्षण के बेहतर फ़ायदे के लिए अपनी बिरादरी को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने को लेकर गूजरों के उग्र आंदोलन में अब तक आधिकारिक तौर पर 39 लोगों की मौत हो चुकी है जिनमें दो पुलिसकर्मी हैं.
इनमें से अधिकतर शवों का दाह संस्कार नहीं हो सका है और ये पाँच अलग-अलग जगहों पर रखे गए हैं. जयपुर के सवाई मान सिंह अस्पताल और बयाना के सरकारी अस्पतालों में रखे गए शवों को लेने से आंदोलनकारी इनकार कर रहे हैं. इन दो स्थानों के अलावा बयाना, दौसा ज़िले के सिकंदरा और सवाई माधोपुर ज़िले में आंदोलनकारी शवों को अपने क़ब्ज़े में लिए हुए हैं. पहले गूजरों के नेता किरोड़ी सिंह बैंसला ने कहा था कि आरक्षण के मुद्दे पर ठोस पहल होने तक वो इन शवों को नहीं सौंपेंगे लेकिन बाद में उन्होंने शवों का पोस्ट मॉर्टम बाहर के डॉक्टरों से कराने की माँग रखी थी. |
इससे जुड़ी ख़बरें राजस्थान में शवों को लेकर खींचतान जारी30 मई, 2008 | भारत और पड़ोस क्या लाशों पर हो रही है राजनीति?27 मई, 2008 | भारत और पड़ोस राजस्थान: जातीय संघर्ष में चार मारे गए29 मई, 2008 | भारत और पड़ोस दिल्ली का रास्ता रोका, पानीपत में हिंसा29 मई, 2008 | भारत और पड़ोस केंद्र ने विधि मंत्रालय से राय माँगी27 मई, 2008 | भारत और पड़ोस गूजर नेता बैंसला के ख़िलाफ़ मामला दर्ज26 मई, 2008 | भारत और पड़ोस गूजरों की सरकार से वार्ता की संभावना कम25 मई, 2008 | भारत और पड़ोस गूजरों पर फिर फ़ायरिंग, 31 की मौत24 मई, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||