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गुरुवार, 29 मई, 2008 को 09:01 GMT तक के समाचार
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दिल्ली का रास्ता रोका, पानीपत में हिंसा

दिल्ली में गूजर आंदोलन
गुरुवार को गूजरों के आंदोलन का एक साल पूरा हो गया
दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में गुरुवार को गूजर समुदाय के लोगों ने एक दिन का 'रास्ता रोको' आंदोलन किया है. उधर हरियाणा के पानीपत ज़िले में गूजरों के प्रदर्शन के दौरान दो प्रदर्शनकारी मारे गए हैं.

दिल्ली और आसपास के इलाक़े में गूजर समुदाय के लोगों ने राजस्थान में गूजरों के अनुसूचित जाति में शामिल किए जाने की माँग के समर्थन में चक्का-जाम किया और कई जगह यातायात को बाधित किया.

पानीपत ज़िले में एक प्रदर्शनकारी की हत्या तब हुई जब समाल्ख़ा में गूजर समुदाय के सदस्य, राजस्थान के गूजरों के समर्थन में, सुबह हज़ारों की संख्या में दिल्ली-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर उतर आए.

जल्द ही स्थिति बिगड़ गई. प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर लाठी चार्ज, आँसूगैस और रबड़ की गोलियाँ चलाने का आरोप लगाया वहीं पुलिस ने कहा कि प्रदर्शनकारी ने बस में आग लगाने की कोशिश की और पुलिस पर पत्थराव किया.

एक गूजर नेता ने कहा कि एक प्रदर्शनकारी की मौत उसकी आँख में रबड़ की गोली लगने से हुई, वहीं पानीपत के उपायुक्त महेंदर कुमार ने बीबीसी को बताया, "एक आदमी मारा गया है लेकिन ये स्पष्ट नहीं कि उसकी मौत कैसे हुई है क्योंकि जहाँ पुलिस ने रबड़ की गोलियाँ चलाई थीं, वहीं गूजरों की तरफ़ से भी फ़ायरिंग हुई थी."

एक अन्य प्रदर्शनकारी की झड़पों के दौरान घायल हो जाने के बाद मृत्यु हो गई.

 एक आदमी मारा गया है लेकिन ये स्पष्ट नहीं कि उसकी मौत कैसे हुई है क्योंकि जहाँ पुलिस ने रबड़ की गोलियाँ चलाई थीं, वहीं गूजरों की तरफ़ से भी फ़ायरिंग हुई थी
पानीपत के उपायुक्त

पुलिस दिल्ली से चंडीगढ़ की ओर जा रहे राष्ट्रीय राजमार्ग से प्रदर्शनकारियों को हटा चुकी है और रास्ता खोल दिया गया है. पुलिस प्रयास कर रही है कि चंडीगढ़ से दिल्ली की ओर आने वाले रास्ते को भी खुलवाया जाए. उस इलाक़े में ख़ासा तनाव है.

दिल्ली में यातायात प्रभावित

दिल्ली को आसपास के इलाक़ों से जोड़ने वाली कई सड़कों को कई घंटे के लिए जाम कर दिया गया.

पूर्वी दिल्ली के गाज़ीपुर इलाक़े में नेशनल हाइवे-24 पर यातायात कई घंटे बंद रहा.

दिल्ली-हापुर हाइवे और दिल्ली-नोएडा एक्सप्रेस हाइवे पर भी वाहनों का आना-जाना कई घंटे तक रुका रहा.

फ़रीदाबाद-गुड़गाँव सड़क पर भी गूजरों ने जाम लगा दिया और प्रदर्शन कर रहे गूजरों ने महरौली-गुड़गाँव रोड पर बसों को आग भी लगाने की कोशिश की थी. प्रशासन ने इन कोशिशों को नाकाम कर दिया.

दादारी इलाक़े में सुबह-सुबह गूजरों ने कुछ लोकल ट्रेनों को भी रोका.

गूजरों के इस 'एनसीआर रोको' आंदोलन की वजह से दिल्ली में दूध और सब्ज़ियों की आपूर्ति पर कुछ असर दिखाई पड़ा.

गूजर आंदोलन
राजस्थान में अब भी गूजरों का आंदलोन जारी है

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र(एनसीआर) में भी गूजरों ने ट्रेनों और कुछ अहम सड़कों को बंद करने की कोशिश की थी.

गूजरों के बंद को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा और एनसीआर के प्रशासन से शांति बनाए रखने के लिए कड़े कदम उठाने को कहा है.

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में कई हज़ार अतिरिक्त पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है.

गूजरों की आबादी मेहरौली, गाज़ीपुर, पटपड़गंज, बदरपुर, खानपुर, अयानगर, चिलिया गाँव और रामपुर में अधिक है. यहाँ पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है.

एनसीआर में गूजरों के रेल रोकने के आह्वान को देखते हुए आरपीएफ़ के 700 अतिरिक्त जवानों को तैनात किया गया.

राजस्थान में आंदोलन जारी

राजस्थान में गूजर अनुसूचित जनजाति में शामिल किए जाने की मांग कर रहे हैं.

ये आंदोलन पिछले दिनों हिंसक हो गया था जिसमें पुलिस फ़ायरिंग में 41 लोग मारे गए थे.

दिल्ली और आसपास के इलाकों के गूजर भी राजस्थान के गूजरों के आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं.

गूजर आंदोलन
गूजरों ने आंदोलन के दौरान मारे गए लोगों के शवों का दाह संस्कार अब तक नहीं किया है

गूजरों ने गुरुवार को गूजर आंदोलन की बरसी मनाने की तैयारी की है.

गूजर इसे 'शहीदी दिवस' के तौर पर मनाना चाहते हैं. गूजरों के नेताओं ने 13 मई को 'शहीदी दिवस' मनाने की अनुमति मांगी थी. लेकिन प्रशासन ने क़ानून व्यवस्था की दुहाई देते हुए इन्हें इजाज़त नहीं दी थी.

हेलीकॉप्टर से पर्चे भी गिरवाए

गूजरों ने जयपुर बंद का भी आह्वान किया है. जयपुर में बंद को देखते हुए राजस्थान सरकार ने सुरक्षा कड़ी कर दी है.

राजस्थान के पाटौली इलाक़े में गूजरों ने तमाम रास्तों को जाम कर दिया है.

गुरुवार की सुबह सरकार ने राज्य के गूजर बाहुल इलाक़ों में हेलीकॉप्टर से पर्चे भी गिरवाए हैं. राज्य के छह ज़िलों के सैकड़ों कस्बों में तकरीबन तीन लाख पर्चे बरसाए गए.

इन पर्चों में लिखा है - ''गूजर शांति बनाए रखें - अपना आंदोलन छोड़ दें -सरकार तमाम कोशिशें कर रही है.''

राजस्थान की राजधानी जयपुर में वैसे तो गूजरों की आबादी अधिक नहीं है लेकिन फिर भी सरकार ने सुरक्षा कड़ी रखी है.

गूजर बाहुल्य इलाक़ों - दौसा, सिकंदरा, भरतपुर, पीलूपुरा में आंदोलन तेज़ हो सकता है.

इन इलाकों में पुलिस फ़ायरिंग में मारे गए लोगों के शवों का अंतिम संस्कार अब तक नहीं किया गया है.

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