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क़दीर ख़ान पर पाबंदियों में ढील | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान में परमाणु परीक्षण की दसवीं वर्षगाँठ पर देश के प्रमुख वैज्ञानिक अब्दुल क़दीर ख़ान के ख़िलाफ़ लगाई गई पाबंदियों में ढील दे दी गई है. हालांकि उन्होंने बीबीसी से हुई बातचीत में कहा कि अभी उन्हें आज़ादी नहीं मिली है. अब्दुल क़दीर ख़ान को पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम का जनक कहा जाता है और उन्हीं के नेतृत्व में पाकिस्तान ने 1998 में परमाणु परीक्षण किए थे. ईरान, लीबिया और उत्तर कोरिया को परमाणु तकनीक देने के आरोपों के बाद राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की सरकार ने उन्हें नज़रबंद कर दिया था. उधर बुधवार को परमाणु परीक्षण की दसवीं वर्षगांठ थी. सैकड़ों लोगों ने रैलियाँ निकालकर जश्न मनाया. हालांकि कुछ लोगों ने परमाणु हथियारों के ख़िलाफ़ भी प्रदर्शन किया और इसके औचित्य पर सवाल उठाए. 'आज़ादी नहीं' इन ख़बरों के बाद कि क़दीर ख़ान पर लगी कुछ पाबंदियाँ हटा ली गई हैं, बीबीसी उर्दू सेवा ने क़दीर ख़ान से फ़ोन पर बातचीत की. क़दीर खान से जब पूछा गया कि क्या अब वे आज़ाद हैं तो उनका था, “नहीं सिर्फ़ आपसे बात कर सकता हूँ. बात करने में और आज़ादी में बहुत फ़र्क है. आज़ादी के मायने हैं कि मैं घर से बाहर चला जाऊँ, लोगों से मिलूँ.” उल्लेखनीय है कि चार साल पहले क़दीर खान ने ईरान, लीबिया और उत्तर कोरिया को परमाणु तकनीक देने की बात स्वीकार की थी. इस बारे में क़दीर खान का कहना था, “कोई भी जुर्म साबित नहीं हुआ है. अगर सारा दोष एक व्यक्ति पर डाल दें तो मुल्क बच जाता है.” क़दीर खान का कहना था कि सारे भेद ख़ुद-ब-ख़ुद खुल जाएँगे. उन्होंने ये भी कहा कि अगर वक़्त आएगा तो हो सकता है कि वे भी सब कुछ बता दें. उन पर पाबंदियाँ हटाने से पहले उनके घर के बाहर बहुत से लोगों ने इकट्ठे होकर उन पर लगाई गई नज़रबंदी हटाने की माँग की. राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने वर्ष 2004 में उन्हें उनके घर पर ही नज़रबंद करने के आदेश दिए थे. जश्न उधर पाकिस्तान के कई शहरों में सैकड़ों लोगों ने बुधवार को परमाणु परीक्षण के दस साल पूरे होने पर रैलियाँ निकालीं. पाकिस्तान ने 28 मई 2008 को दक्षिणी पश्चिमी प्रांत बलूचिस्तान में पाँच परमाणु परीक्षण किए थे. पाकिस्तान ने ये परमाणु परीक्षण भारत के परीक्षण के जवाब में किए थे. नवाज़ शरीफ़ की पार्टी के नेता जावेद हाशमी ने मुल्तान शहर में एक रैली का नेतृत्व किया. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार उन्होंने कहा, "पाकिस्तान ने अमरीकी दबाव को दरकिनार करते हुए परमाणु परीक्षण किए थे क्योंकि यह देश की सुरक्षा के लिए ज़रूरी था." इसी तरह की रैलियाँ कई अन्य शहरों में भी निकालीं गईं. लेकिन बलूचिस्तान के क्वेटा शहर में कोई पाँच सौ छात्रों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने पाकिस्तान के लिहाज़ से एक दुर्लभ रैली निकाली और परमाणु हथियारों का विरोध किया. एक छात्र नेता ने समाचार एजेंसी से कहा, "परमाणु हथियार मानवता के ख़िलाफ़ हैं." |
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