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एड्स से लड़ती-बढ़ती एक औरत बनी मिसाल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एड्स से पीड़ित लोग आमतौर पर समाज और स्वयंसेवी संस्थाओं के रहमो- करम पर जीते हैं लेकिन अहमदाबाद की वर्षा वाला एक अपवाद हैं. वर्षा वाला एड्स रोगी हैं लेकिन न केवल वो हिम्मत से काम लेते हुए इस बीमारी से लड़ रही हैं बल्कि सैकड़ों एड्स पीड़ितों के लिए उम्मीद बन कर उभरी हैं. वर्षा अहमदाबाद में एड्स रोगियों के लिए स्वयंसेवी संस्था चलाती हैं जहां एचआईवी पीड़ित लोग काम करते हैं और रोज़ी कमाते हैं. लेकिन क्या काम करते हैं ये लोग? वर्षा बताती हैं, "हमने शुरुआत की थी नाश्ता बनाने के काम से. हम थेपला, खाखरा, भाखरी, समोसा जैसी चीज़ें बना कर शहर में बेचते हैं. जहां कहीं कोई उत्सव होता है तो हम अपना स्टॉल लगाते हैं और शादी-ब्याह के ऑर्डर भी लेते हैं." वर्षा की यह शुरुआत तो छोटी थी लेकिन अब उनके साथ सैकड़ों लोग काम कर रहे हैं. लेकिन ये काम इतना आसान भी नहीं था. वर्षा बताती हैं कि जब शुरू में लोगों को पता चला कि नाश्ते का ये सारा सामान एड्स रोगी बनाते हैं तो लोग इन्हें खरीदने से झिझकते थे. वो कहती हैं, "शुरू में दिक्कत हुई लेकिन फिर कई स्वयंसेवी संस्थाओं ने लोगों में जागरूकता पैदा की कि एड्स रोगी का बनाया कुछ भी खाने से किसी को एड्स नहीं हो जाता. उसके बाद धीरे-धीरे यह व्यवसाय आगे बढ़ता गया." काम का सम्मान वर्षा को पिछले दिनों अपने प्रयासों के लिए यूनिसेफ़ और विश्व बैंक की एक योजना के तहत पुरस्कार राशि मिली है जिससे वो अपना व्यवसाय बढ़ाने वाली हैं.
आगे की योजना के बारे में वर्षा बताती हैं कि वो एक कैंटीन खोलना चाहती हैं ताकि लोग वहां आकर खाना खा सकें. इसके अलावा पैकेज्ड भोजन की श्रृंखला खोलने की भी योजना है वर्षा की. वर्षा के पति और दो छोटे बच्चे भी एड्स पीड़ित हैं लेकिन अभी बच्चों को यह नहीं बताया गया है. वो बताती हैं कि उन्हें ससुराल से काफ़ी सहयोग मिला है और अब उन्हें इस बात का कोई गिला नहीं है कि उन्हें एड्स है. वो इसे चुनौती की तरह स्वीकार कर चुकी हैं और जीवन में आगे बढ़ रही हैं. वो कहती हैं, "जो हो गया उसका कुछ नहीं किया जा सकता. अब आगे हमें अपनी और बाक़ी रोगियों के जीवन में बदलाव लाने की कोशिश करनी है." वर्षा उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं जो असाध्य रोगों से पीड़ित हैं. वर्षा से सीखा जा सकता है कि जीवन में कोई भी मुश्किल किसी को आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती. | इससे जुड़ी ख़बरें एड्स के रोगी अनुमान से कम06 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस अब पछताए होत का जब...25 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस एड्स और समाज से जूझती औरत27 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस ट्रक चालकों को एड्स से बचाने की मुहिम29 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस भारत में एचआईवी मामलों में कमी22 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस एड्स पर जागरूकता फैलाने की मुहिम01 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस दर्द साथ सहने के लिए जोड़ा रिश्ता20 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस एचआईवी ग्रस्त माँग रहे है 'इच्छा मृत्यु' 09 मई, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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