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सहायता एजेंसियों की सतर्क प्रतिक्रिया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियों ने सभी विदेशी राहतकर्मियों को बर्मा में आने की अनुमति देने पर सतर्क प्रतिक्रिया दी है. बर्मा तूफ़ान से हुई तबाही से जूझ रहा है. संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम ने बर्मा की सैनिक सरकार के फ़ैसले का स्वागत किया है. हालाँकि वो कुछ मुद्दों पर संशय की स्थिति में हैं. उसका कहना है कि देखने वाली बात ये होगी कि राहतकर्मियों को मुख्य शहर रंगून से तूफ़ान प्रभावित इरावदी क्षेत्र में जाने की अनुमति मिलती है या नहीं. फिलहाल संयुक्त राष्ट्र के दस हेलिकॉप्टरों को प्रभावित इलाक़ों में राहत सामग्री पहुँचा कर लौट जाने की अनुमति दी गई है. सहायता एजेंसियों का कहना है कि आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों का प्रभावित इलाक़ों में जाना बेहद ज़रूरी है लेकिन उन्हें अनुमति मिलेगी या नहीं ये स्पष्ट नहीं है. बर्मा के सैनिक शासक जनरल थान श्वे और संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून के बीच शुक्रवार को हुई बैठक सफल रही. जनरल थान श्वे अड़ियल रुख़ से पीछे हटे और सभी विदेशी सहायताकर्मियों को तूफ़ान प्रभावित इलाक़ों में जाने देने पर सहमत हो गए. संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने इसे एक बड़ी सफलता बताया है. चक्रवातीय तूफ़ान नर्गिस ने 78 हज़ार लोगों की जानें ली है और लगभग 56 हज़ार लोग अभी भी लापता हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें 'सभी राहतकर्मियों को अनुमति मिलेगी'23 मई, 2008 | भारत और पड़ोस बर्मा में तीन दिन का राष्ट्रीय शोक20 मई, 2008 | पहला पन्ना बर्मा में होगा तीन दिन का शोक19 मई, 2008 | पहला पन्ना बर्मा के सहायता प्रयासों का समर्थन 20 मई, 2008 | पहला पन्ना 'भूख से हो रही है बच्चों की मौत'18 मई, 2008 | भारत और पड़ोस ब्रिटेन, फ़्रांस ने बर्मा की कड़ी आलोचना की17 मई, 2008 | पहला पन्ना बर्मा को राज़ी करने की कोशिश15 मई, 2008 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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