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गुरुवार, 22 मई, 2008 को 09:45 GMT तक के समाचार
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चीन बदल रहा है: दलाई लामा
दलाई लामा
चीन ने ल्हासा में हुए प्रदर्शनों में दलाई लामा का हाथ बताया था
शीर्ष तिब्बती धार्मिक नेता दलाई लामा ने कहा है कि चीन बदल रहा है और उम्मीद जताई है कि इससे चीन 'तिब्बत के मुद्दे पर और पारदर्शी रुख़' अपना सकता है.

लंदन में बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में दलाई लामा ने कहा कि सिचुआन प्रांत में आए विनाशकारी भूकंप के बाद चीन की प्रतिक्रिया इस बदलाव का संकेत है.

उन्होंने कहा कि तिब्बती लोगों की स्वतंत्रता की माँग के बावज़ूद, वे स्वायत्ता जैसा 'मध्य-मार्ग' चाहते हैं.

लेकिन उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि स्थिति नहीं सुधरी तो तिब्बती लोगों में निराशा बढ़ती जाएगी. दलाई लामा ने ये भी कहा कि वह भविष्य के बारे में आशावादी हैं.

हर दशक बदलाव

 यह एक संकेत है कि पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ़ चायना बदल रहा है - मेरा मानना है कि कम से कम हर दशक बदलाव आ रहा है. उम्मीद है कि अब तिब्बत के मुद्दे समेत अन्य क्षेत्रों में भी रुख़ और पारदर्शी होगा
दलाई लामा

तिब्बतियों के धर्मगुरु दलाई लामा का कहना था चीन बाक़ी की दुनिया के व्यापक संपर्क में आ रहा है और चीन जिस तरह से सिचुआन प्रांत में आए भूकंप से निपट रहा है वह रुख़ में आए बदलाव का एक उदाहरण है.

चीन की सरकार ने इस वर्ष 10 मार्च से तिब्बत की राजधानी ल्हासा में शुरू हुए चीन विरोधी प्रदर्शनों के लिए दलाई लामा को ज़िम्मेदार ठहराया था. दलाई लामा लगातार इससे इनकार करते आए हैं.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "यह एक संकेत है कि पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ़ चायना बदल रहा है - मेरा मानना है कि कम से कम हर दशक बदलाव आ रहा है. उम्मीद है कि अब तिब्बत के मुद्दे समेत अन्य क्षेत्रों में भी रुख़ और पारदर्शी होगा."

स्वतंत्रता का सवाल

 हम अलगाव नहीं चाहते हैं. चीन और तिब्बत दोनों के हित में हैं कि वे साथ रहें. तिब्बत की बौद्ध संस्कृति चीन की सभ्यता में महान योगदान दे सकती है. को विकसित किया है. कभी न कभी हमें चीन की सरकार के बातचीत करनी होगी ताकि स्वतंत्रता या अलगाव का सवाल पूरी तरह से इस चर्चा से बाहर हो जाए
दलाई लामा

चीन की सरकार ने दलाई लामा पर आरोप लगाया है कि ल्हासा में पिछले कुछ महीनों में हुए चीन विरोधी प्रदर्शनों में दलाई लामा का हाथ है. बाद में इन प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया और दंगे भी भड़क उठे थे.

दलाई लामा इसका खंडन करते रहे हैं.

वह लगातार यह कह रहे हैं कि वह 'चीन से स्वतंत्रता' की माँग नहीं कर रहे हैं.

उनका कहना था, "हम अलगाव नहीं चाहते हैं. चीन और तिब्बत दोनों के हित में हैं कि वे साथ रहें. तिब्बत की बौद्ध संस्कृति चीन की सभ्यता में महान योगदान दे सकती है. कभी न कभी हमें चीन की सरकार के बातचीत करनी होगी ताकि स्वतंत्रता या अलगाव का सवाल पूरी तरह से इस चर्चा से बाहर हो जाए."

उन्होंने कहा कि रक्षा और विदेश मंत्रालय केंद्रीय सरकार के नियंत्रण में होने चाहिए लेकिन अन्य क्षेत्र जैसे शिक्षा, पर्यावरण और धार्मिक कार्यों जैसे मंत्रालयों को तिब्बतियों को ख़ुद चलाना चाहिए.

उन्होंने माना कि केवल बाहर ही नहीं बल्कि तिब्बतियों के बीच भी कुछ लोग उनके इस दृष्टिकोण के ख़िलाफ़ हैं लेकिन उन्हें मनाना संभव है.

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