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मून को हेलीकॉप्टर से घुमाया गया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने बर्मा पहुँच कर तूफ़ान प्रभावित इरावदी क्षेत्र का दौरा किया है और बर्मा के सैन्य नेता से भी मुलाक़ात की है. इरादवीद क्षेत्र कुछ सप्ताह पहले आए भीषण नरगिस नामक तूफ़ान से बुरी तरह प्रभावित हुआ था और वहाँ जानमाल की भारी तबाही हुई है. बर्मा की सैनिक सरकार ने हेलीकॉप्टरों से बान की मून को तूफ़ान प्रभावित इलाक़ों का दौरा कराया है. बान की मून के साथ मौजूद बीबीसी संवाददाता लौरा ट्रेविलियन का कहना है कि इस दौरे में बान की मून को एक ऐसा शरणार्थी शिविर भी दिखाया गया जो बिल्कुल साफ़-सुथरा था. काफ़ी टैंट वहाँ ख़ाली भी पड़े थे और उनमें से अनेक टैंट तो बिल्कुल नए थे, जैसेकि वे इस्तेमाल ही नहीं हुए हों. वहाँ एक खाद्य सामग्री वितरण केंद्र भी बनाया हुआ था. बर्मा के प्रधानमंत्री थीन श्वे ने बान की मून से कहा कि राहत कार्य अब समाप्ति की ओर हैं और अब समय आ गया है कि पुनर्निर्माण कार्य शुरू किए जाएँ. बर्मा में इस तूफ़ान में अब तक लगभग 80 हज़ार लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है जबकि हज़ारों अन्य लापता हैं. बान की मून ने चिंता जताई है कि संयुक्त राष्ट्र की सहायता लगभग पाँच लाख लोगों तक ही पहुँच पा रही है जबकि बर्मा में लगभग बीस लाख लोगों को तुरंत सहायता की ज़रूरत है. एक विदेशी डॉक्टर ने बीबीसी से कहा कि अब भी बहुत से लोग छोटे-छोटे तालाबों से पानी पीने के लिए मजबूर हैं. डॉक्टर का कहना है था कि बच्चे और बुज़ुर्ग लोग दस्त, पेट की ख़राबी, डेंगू बुख़ार और अन्य बीमारियों का सामना कर रहे हैं. इस बीच बान की मून ने इन ख़बरों का खंडन किया है कि उनकी यात्रा के ज़रिए बर्मा के तूफ़ान प्रभावित इलाक़ों की भ्रामक तस्वीर देने की कोशिश की जा रही है. राजनीति ना करें बान की मून ने अपना बर्मा दौरा शुरू करते हुए कहा था कि लोगों की जान बचाने को प्राथमिकता देनी चाहिए ना कि राजनीति को. बर्मा की सैनिक सरकार ने बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय मदद लेने से इनकार कर दिया था लेकिन दबाव पड़ने के बाद संयुक्त राष्ट्र के कुछ हेलिकॉप्टरों को राहत सामग्री उतारने की अनुमति दी गई. चक्रवातीय तूफ़ान नर्गिस से हुई तबाही के लगभग बीस दिन बाद भी सहायता एजेंसियों का कहना है कि वो प्रभावित इलाक़ों में अपनी क्षमता का सिर्फ़ तीस फ़ीसदी काम कर पा रहे हैं. लाखों लोगों को तूफ़ान ने बेघर कर दिया. संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि 24 लाख लोग इससे प्रभावित हुए हैं जबकि सिर्फ़ एक चौथाई प्रभावितों तक राहत पहुँची है. ब्रिटेन, फ़्रांस और अमरीका के कई जलपोत खाद्य और अन्य सामानों के साथ लंगर डाले खड़े हैं लेकिन उन्हें बर्मा के तटों पर आने की इजाज़त नहीं दी गई है. बैंकॉक से बर्मा रवाना होने से पहले बान की मून ने कहा था, "हमें बर्मा के लोगों के लिए जहाँ तक संभव हो सके प्रयास करना चाहिए. ये बर्मा के लिए अहम समय है. ख़ुद वहाँ की सरकार मान रही है कि इससे बड़ी विपदा पहले नहीं आई." | इससे जुड़ी ख़बरें बर्मा में तीन दिन का राष्ट्रीय शोक20 मई, 2008 | पहला पन्ना बर्मा में होगा तीन दिन का शोक19 मई, 2008 | पहला पन्ना बर्मा के सहायता प्रयासों का समर्थन 20 मई, 2008 | पहला पन्ना 'भूख से हो रही है बच्चों की मौत'18 मई, 2008 | भारत और पड़ोस ब्रिटेन, फ़्रांस ने बर्मा की कड़ी आलोचना की17 मई, 2008 | पहला पन्ना बर्मा को राज़ी करने की कोशिश15 मई, 2008 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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