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अवैध शराब से मरने वाले 150 हुए | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पुलिस का कहना है कि कर्नाटक और तमिलनाडु में अवैध रुप से बनाई गई कच्ची शराब का शिकार हुए लोगों की संख्या बढ़कर 150 तक जा पहुँची है. इस शराब का सेवन करने वाले 135 लोग अभी भी अस्पताल में हैं और इनमें से कुछ की हालत गंभीर बताई गई है. दोनों राज्यों की सीमा पर यह शराब का अवैध व्यापार करने वालों ने यह शराब बेची थी. पुलिस ने अवैध शराब बेचने के आरोप में 16 लोगों को गिरफ़्तार किया है. इसका शिकार होने वालों में ज़्यादातर लोग ग़रीब और दूसरे राज्यों से आए मज़दूर हैं. इस तरह अवैध शराब से मौत की घटना दक्षिण भारत के इस इलाक़े के लिए नई नहीं है और वहाँ से पहले भी इसकी ख़बरें मिलती रही हैं. मुआवज़ा पुलिस का कहना है कि कर्नाटक राज्य में कुल 107 लोगों की मौत हुई है जबकि 41 लोग तमिलनाडु में मारे गए हैं. अधिकारियों को डर है कि मरने वालों की संख्या और अधिक हो सकती है. कर्नाटक के राज्यपाल रामेश्वर ठाकुर ने शराब पीने से मारे गए लोगों के परिवारों को 50-50 हज़ार रुपए का मुआवज़ा देने की घोषणा की है. कर्नाटक सरकार ने कहा है कि जिनका इलाज निजी अस्पताल में चल रहा है, उनका ख़र्च सरकार उठाएगी. उधर तमिलनाडु के कृष्णागिरी ज़िले के ज़िलाधिकारी ने मृतकों के सगे संबंधियों को 10-10 हज़ार रुपए का मुआवज़ा दिया. कर्नाटक में 22 मई को तीसरे चरण का चुनाव होना है. इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मृत्यु से राजनीतिक दल नाराज़ हैं. विपक्ष इस घटना की जाँच की माँग कर रहा है. पुलिस सूत्रों का कहना है कि शराब में इथेनॉल मिला दिया गया था. |
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