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बर्मा की मदद के लिए आसियान की बैठक | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दक्षिण पूर्व एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन यानि आसियान की एक बैठक हो रही है जिसमें बर्मा में तूफ़ान प्रभावित लोगों की मदद के तरीकों पर विचार होगा. सिंगापुर में होने वाली इस बैठक में आसियान देशों के विदेश मंत्री इकठ्ठा होंगे और उम्मीद की जा रही है कि बर्मा आसियान देशों की तरफ़ से दी जाने वाली सहायता स्वीकार कर लेगा. बर्मा अभी तक बहुत सारे देशों की तरफ़ से आने वाली सहायता अस्वीकार कर चुका है. लेकिन आसियान की समस्या ये है कि इस संगठन में कोई भी फ़ैसला सर्वसम्मति से ही हो सकता है. बर्मा का कहना है कि 2 मई को आए समुद्री तूफ़ान में 78,000 लोगों की मौत हो गई थी, लेकिन सहायता पहुँचाने वाली संस्थाओं का कहना है कि मरने वालों की तादाद बहुत ज़्यादा है. बातचीत से पहले मलेशिया के विदेश मंत्री राइस यातिम ने बीबीसी को बताया कि बर्मा में पीड़ितों के लिए मदद नहीं पहुँच पाने से निराशा व्याप्त है. राइस यातिम ने कहा कि बिना बर्मा के सहयोग के ज़्यादा कुछ संभव नहीं है. आलोचना सारी दुनिया में बर्मा की सरकार की आलोचना हो रही है कि वह अंतरराष्ट्रीय मदद के प्रभावित क्षेत्रों में पहुँचने में बाधा डाल रही है. इसी हफ़्ते ब्रिटेन के प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने बर्मा सरकार के कथित रवैये को अमानवीय बताया था.
बीबीसी के जोनाथन हेड कहते हैं बर्मा के रवैये से दुनिया भर में इतना रोष है कि आसियान देशों को भी पता है कि उन्हें कोई न कोई कदम उठाने होंगे. जोनाथन हेड का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय सहायता को आसियान देशों की एजेंसियों की मदद से बर्मा भेजा जा सकता है. उम्मीद की जा रही है कि बर्मा को आसियान देशों की एजेंसियाँ की तरफ़ से दी जाने वाली सहायता मंज़ूर होगी. इस बीच रविवार को पहली बार बर्मा की सैनिक सरकार के नेता जनरल थान श्वे ने रंगून के नज़दीक बनाए गए राहत कैंपों में शरण लिए हुए तूफ़ान पीड़ितों से मुलाकात की. संयुक्त राष्ट्र संघ का एक प्रतिनिधि पहले ही बर्मा में मौजूद है ताकि बर्मा पर औऱ ज़्यादा अंतरराष्ट्रीय सहायता स्वीकार करने के लिए दबाव बनाया जा सके. संयुक्त राष्ट्र अध्यक्ष बानकी मून भी जल्द ही बर्मा की यात्रा पर आने वाले हैं. |
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