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मंगलवार, 06 मई, 2008 को 02:01 GMT तक के समाचार
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महिला आरक्षण बिल पर भारी हंगामा
महिलाएँ (फ़ाइल फ़ोटो)
कई दल महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में आरक्षण के विरोध में है
राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक को पेश करते वक्त जमकर हंगामा हुआ और समाजवादी पार्टी के कुछ नेताओं ने क़ानून मंत्री के हाथ से इसकी प्रति छीनने की कोशिश की.

इसके बावजूद राज्यसभा में विधेयक पेश कर दिया गया लेकिन हंगामे के कारण इसके तुरंत बाद कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी.

राज्यसभा में समाजवादी पार्टी के अबू आज़मी और उनकी पार्टी के अन्य सदस्य राज ठाकरे के उत्तर भारतीयों के ख़िलाफ़ बयान पर विरोध जता रहे थे और स्पीकर के आसन के पास नारेबाज़ी कर रहे थे.

इसी दौरान क़ानून मंत्री हंसराज भारद्वाज विधेयक पेश करने के लिए खड़े हुए, तो कुछ सदस्यों ने उनसे विधेयक की प्रति छीनने की कोशिश की. लेकिन क़ानून मंत्री किसी तरह इसे पेश करने में सफल रहे.

इसके पहले सोमवार को देर रात केंद्रीय मंत्रिमंडल को बैठक में ये तय हुआ है कि विधेयक को पहले राज्यसभा में पेश किया जाए.

 महिला आरक्षण पर विभिन्न राजनीतिक दल न तो गंभीर हैं और न ही इसके प्रति उनकी कोई आस्था है. ये सब नौटंकी है और इसे पेश करना महज एक सांकेतिक बात भर है
नीरजा चौधरी, राजनीतिक विश्लेषक

नियमों के अनुसार इसके बाद इस विधेयक को संसद की स्थाई समिति के सामने रखा जाएगा और सांसद समिति की बैठकों में विधेयक पर अपने सुझाव दे सकेंगे.

विधेयक इस सत्र में लोक सभा में पेश हो नहीं पाएगा क्योंकि लोकसभा का सत्र सोमवार को ही ख़त्म हो गया.

केंद्र सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामपंथी दलों ने इस विधेयक के पक्ष में सरकार पर दबाव बनाया था.

इसके तहत संसद में महिलाओं के लिए 33 फ़ीसदी सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है.

विरोध

समाजवादी पार्टी और विपक्षी राष्ट्रीय जनतांत्रितक गठबंधन (एनडीए) में शामिल जनता दल (युनाइटेड) भी विधेयक का विरोध कर रहा है.

इन दलों का कहना है कि विधेयक में दलितों और अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण की व्यवस्था होनी चाहिए.

जद-यू अध्यक्ष शरद यादव का कहना है कि मौजूदा विधेयक सिर्फ़ शहरी महिलाओं के लिए है.

समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह भी साफ़ कर चुके हैं कि पिछड़ी महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण की व्यवस्था हुए बगैर ये विधेयक उनकी पार्टी को मान्य नहीं होगा.

राजनीतिक विश्लेषक नीरजा चौधरी का कहना है,'' महिला आरक्षण पर विभिन्न राजनीतिक दल न तो गंभीर हैं और न ही इसके प्रति उनकी कोई आस्था है. ये सब नौटंकी है और इसे पेश करना महज एक सांकेतिक बात भर है.''

उनका कहना था कि इसे पेश कर सरकार ये दिखाना चाहती है कि हम तो महिला आरक्षण चाहते हैं पर और दल ऐसा करने नहीं देते.

ग़ौरतलब है कि ग्यारहवीं लोकसभा में पहली बार ये विधेयक पेश हुआ था तो उस समय उसकी प्रतियां फाड़ी दी गईं थीं.

इसके बाद 13वीं लोकसभा में भी तीन बार विधेयक पेश करने का प्रयास हुआ, लेकिन हर बार हंगामे और विरोध के कारण ये पेश नहीं हो सका था.

उल्लेखनीय है कि महिला आरक्षण विधेयक में संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित किए जाने की व्यवस्था है.

महिला आरक्षण विधेयक एक संविधान संशोधन विधेयक है और इसलिए इसे दो तिहाई बहुमत से पारित किया जाना ज़रूरी है.

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