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मंगलवार, 21 नवंबर, 2006 को 23:48 GMT तक के समाचार
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दोनों सदनों की बैठक स्थगित
संसद भवन
संसद सत्र ऐसे समय शुरु हो रहा है जब चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ भारत की यात्रा पर हैं
भारतीय संसद का शीतकालीन सत्र बुधवार से शुरु हो गया है. सत्र के पहले दिन कई दिवंगत लोगों को श्रद्धांजलि दी गई.

इसके बाद राज्य सभा और लोक सभा की कार्यवाही 23 नवंबर दोपहर 11 बजे . तक स्थगित कर दी गई.

शीतकालीन सत्र में महिला आरक्षण, भारत-अमरीका परमाणु सहयोग, भारत-चीन रिश्ते, अफ़जल को फ़ाँसी दिए जाने का आदेश और उस पर चली बहस के साथ-साथ आर्थिक मुद्दे उठने की संभावना है.

राजनीतिक पर्यवेक्षक आलोक मेहता के अनुसार सरकार की कोशिश रही है कि वह महिला आरक्षण के मुद्दे पर सर्वसम्मति बनाए, चाहे फिर ये सहयोगी दलों को समझाकर किया जाए या फिर सर्वदलीय बैठक के ज़रिए हो.

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) में महिला आरक्षण के विधेयक पर सहमति नहीं बन पाई है और सोनिया गाँधी की कोशिश रहेगी कि वे ख़ुद राष्ट्रीय जनता दल और लालू प्रसाद यादव को इस बारे में संतुष्ट करें.

आलोक मेहता का कहना है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में भी ऐसे कुछ दल हैं जो इस विषय में विधेयक लाने का समर्थन कर दें.

उनके अनुसार आने वाले महीनों में सरकार के सामने जो चुनौतियाँ है और जिस तरह के संकेत यूपीए अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने दिए हैं, उनसे लगता है कि वो चाहती हैं कि किसी चुनाव में जाते समय कांग्रेस को ये श्रेय प्राप्त हो कि उसने महिलाओं के लिए ये 'क्रांतिकारी' कदम उठाया.

भारत-अमरीका परमाणु सहयोग पर भारत सरकार का पक्ष रहा है वह जुलाई 2005 में हुए समझौते पर अडिग रहेगी. उधर वामपंथी दलों और भारतीय जनता पार्टी की इस विषय पर कोशिश होगी कि सरकार को कटघरे में खड़ा किया जाए.

आलोक मेहता कहते हैं कि टकराव तो रहेगा लेकिन अमरीका को ये बताने की कोशिश की जाएगी कि भारतीय संसद जो भी समझौता स्वीकार करेगी वह भारत के राष्ट्रीय हितों को समक्ष रखकर किया गया भारत का ख़ुद का फ़ैसला होगा.

भारत-अमरीका परमाणु सहयोग के मसले पर केंद्र सरकार को कई जवाब देने पड़ सकते हैं क्योंकि कई क़ानून पेच इससे जुड़े हुए हैं.

चीन के राष्ट्रपति की जारी यात्रा और उससे पहले उठा अरुणाचल का मुद्दा भी संसद के सत्र में उठ सकता है.

आर्थिक मुद्दों पर सरकार को विपक्ष को संतुष्ट करना होगा कि जो विकास दर वह दिखा रही है, उसका लाभ किसानों और आम जनता को मिल पा रहा है.

वामपंथी दलों के पास आर्थिक क्षेत्र में विशेष आर्थिक ज़ोन बनाने का बड़ा मुद्दा है. वामपंथी दलों का दबाव होगा कि वह सरकार से जान सके कि क्या किसानों के हितों का ध्यान रखा जा रहा है या नहीं.

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