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गुरुवार, 01 जून, 2006 को 19:57 GMT तक के समाचार
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'लाभ के पद' को लेकर राजनीति तेज़
मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी
सोनिया गांधी ने लाभ के पद के विवाद के बाद लोक सभा से इस्तीफ़ा दे दिया था
'लाभ के पद' संबंधी विधेयक को लेकर राजनीति तेज़ हो गई है.

एक ओर जहाँ वामपंथी दलों ने गुरुवार को सार्वजनिक रूप से 'लाभ के पद' संबंधी संशोधित विधेयक का समर्थन किया तो दूसरी ओर भाजपा ने चुनाव आयोग से इससे संबंधित शिकायतों पर जल्द कार्रवाई की माँग की.

ग़ौरतलब है कि राष्ट्रपति कलाम ने इस विधेयक को पुनर्विचार के लिए वापस भेज दिया था. शुक्रवार को मंत्रिमंडल की बैठक में इस पर विचार किए जाने की संभावना है.

सीपीएम महासचिव प्रकाश कारत ने पत्रकारों से बातचीत में कहा,'' सरकार को विधेयक को सांविधानिक प्रक्रिया से गुजारने के बाद वापस भेज देना चाहिए.''

सीपीआई महासचिव एबी बर्धन राष्ट्रपति कलाम की आपत्तियों से अपनी असहमति पहले ही जता चुके हैं. उनका कहना है कि राज्यों की लाभ के पद की अलग परिभाषाएँ हैं.

वामपंथी दलों की दिक्कत यह है कि लाभ के पद को लेकर उसके कई सांसदों की शिकायतें चुनाव आयोग को की गईं हैं.

भाजपा की माँग

इधर भाजपा इस अवसर को हाथ से नहीं जाने देना चाहती. पार्टी ने बुधवार को चुनाव आयोग को एक ज्ञापन सौंपा जिसमें मांग की गई है कि लाभ के पदों पर बैठे 46 सांसदों के ख़िलाफ़ दायर याचिकाओं पर तुरंत निर्णय लिया जाए.

 सरकार को विधेयक को सांविधानिक प्रक्रिया से गुजारने के बाद वापस भेज देना चाहिए
प्रकाश कारत, महासचिव सीपीएम

सीपीएम ने भाजपा की माँग की आलोचना की है. सीपीएम महासचिव प्रकाश कारत का कहना था कि भाजपा ने मौक़ा देख कर चुनाव आयोग से कार्रवाई तेज़ करने की मांग की है.

उनका कहना था कि चुनाव आयोग को इस मामले में जल्दबाज़ी नहीं दिखानी चाहिए.

इसके पहले क़ानून मंत्री हंसराज भारद्वाज ने पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि संसद ने जिस विधेयक को पारित किया, उसमें कोई कमी नहीं है. लेकिन राष्ट्रपति ने उसे वापस किया है तो उस पर पुनर्विचार किया जाएगा.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी बुधवार को इसी सिलसिले में राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से मुलाक़ात की थी.

राष्ट्रपति कलाम ने विधेयक को वापस करते हुए कहा था कि कौन से पद लाभ के पद की परिधि में नहीं आते हैं, इसे तय करते वक्त निष्पक्षता का ध्यान रखना चाहिए.

साथ ही यह भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि केंद्र सरकार द्वारा पारित यह विधेयक सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी समान और पारदर्शी तरीके से लागू हो सके.

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