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रविवार, 26 मार्च, 2006 को 05:54 GMT तक के समाचार
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'लाभ के पद' पर सहमति की कोशिश
भारतीय संसद
संसद के चालीस से अधिक सांसदों के बारे में पहले ही शिकायतें मिल चुकी हैं कि वे लाभ के पदों पर हैं
भारत में 'लाभ के पद' पर विवाद तेज़ होने के बाद केंद्र की यूपीए सरकार विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाने की कोशिश कर रही है.

केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री प्रियरंजन दासमुंशी ने शनिवार को कई राजनीतिक नेताओं से चर्चा की और इस मुद्दे पर उनकी राय जानने की कोशिश की और रविवार को भी विचारविमर्श जारी है.

यदि सहमति बन जाती है तो सरकार लाभ के पद को नए सिरे से परिभाषित करने के लिए क़ानून बनाएगी.

इस बीच चुनाव आयोग को 'लाभ के पद' को लेकर नौ नई शिकायतें मिली हैं.

उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले यह विवाद खड़ा हो गया था कि कोई व्यक्ति 'लाभ के पद' पर रहते हुए संसद के किसी सदन का सदस्य नहीं रह सकता.

हालाँकि संसद के किसी भी सदन के लिए निर्वाचित होने की यह संवैधानिक शर्त है कि उम्मीदवार को किसी लाभ के पद पर नहीं होना चाहिए लेकिन जया बच्चन के मामले और इसके बाद सरकार की ओर से कथित तौर पर अध्यादेश लाने की कोशिशों की वजह से इस विवाद ने नया मोड़ ले लिया.

चुनाव आयोग ने फ़िल्म अभिनेत्री और राज्य सभा सदस्य जया बच्चन की सदस्यता इसी आधार पर रद्द करने की सिफ़ारिश कर दी थी क्योंकि वह उत्तर प्रदेश फ़िल्म विकास निगम की अध्यक्ष थीं जिसे लाभ का पद माना गया.

उसके बाद लोकसभा में हंगामा होने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने भी संसद की सदस्यता और राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.

विचार-विमर्श

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कहने पर संसदीय कार्यमंत्री प्रियरंजन दासमुंशी ने विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं से मुलाक़ात की है.

रविवार को उन्होंने जनता दल यू के नेता शरद यादव से मुलाक़ात की है.

सोनिया गाँधी
सोनिया गाँधी के इस्तीफ़े के बाद विपक्षी दलों का रुख़ बदला हुआ सा दिखता है

शनिवार को दासमुंशी ने यूपीए सरकार में शामिल दलों के नेताओं, सरकार को समर्थन दे रहे वामपंथी दलों के नेताओं और कुछ विपक्षी नेताओं से मुलाक़ात की थी.

दासमुंशी ने एक ओर जहाँ एनसीपी नेता शरद पवार, एलजेपी नेता रामविलास पासवान से मुलाक़ात की तो सीपीएम के नेता सीताराम येचुरी और सीपीआई नेता डी राजा से भी अलग-अलग मुलाक़ात की.

इसके बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के नेता लालकृष्ण आडवाणी और जसवंत सिंह आदि से मुलाक़ात की तो बसपा नेता मायावती से भी उन्होंने 'लाभ के पद' के मुद्दे पर उनकी राय जाननी चाही.

ख़बरें हैं कि सरकार की ओर से इन नेताओं से ये जानने की कोशिश की गईं कि क्या इस समय कोई अध्यादेश लाने की संभावना है या फिर सरकार को कोई क़ानून बनाया जाना चाहिए.

सरकार ये भी जानने में लगी हुई है कि यदि इसके लिए संसद का सत्र बुलाया जाता है तो उसके लिए कौन सा समय निर्धारित किया जाए.

 क़ानून पर अपनी राय हम तभी देंगे जब सरकार उसका प्रारूप पेश करेगी
जसवंत सिंह

कम्युनिस्ट पार्टियों के नेताओं और भाजपा ने साफ़ कर दिया है कि वे अध्यादेश के पक्ष में नहीं है लेकिन वे चाहते हैं कि क़ानून बनाया जाना चाहिए.

भाजपा नेता जसवंत सिंह ने कहा, "क़ानून पर अपनी राय हम तभी देंगे जब सरकार उसका प्रारूप पेश करेगी."

उल्लेखनीय है कि सरकार को संसद सदस्यता को लेकर 1959 में बने क़ानून में संशोधन करना होगा.

प्रियरंजन दासमुंशी नेताओं से संपर्क तो कर रहे हैं लेकिन वे अभी ये नहीं बता रहे हैं कि क़ानून का प्रारूप कैसा होगा और संसद का सत्र कब बुलाया जाएगा.

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