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सीपीएम क़ानून बनाने के पक्ष में | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) ने 'लाभ के पद' को फिर से परिभाषित करने के लिए क़ानून बनाने का समर्थन करते हुए कहा है कि संसद को इसका अधिकार है. यूपीए सरकार को समर्थन दे रही सीपीएम का यह समर्थन ऐसे समय में आया है जब चर्चा चल रही है कि संसद का सत्र अचानक ख़त्म कर यूपीए सरकार इसके लिए एक अध्यादेश लाने जा रही है. विपक्ष का आरोप है कि सोनिया गाँधी सहित कई प्रमुख सांसदों की सदस्यता बचाने के लिए सरकार ऐसा कर रही है. उल्लेखनीय है कि समाजवादी पार्टी की सांसद जया बच्चन की सदस्यता समाप्त किए जाने के बाद कथित तौर पर 'लाभ के पद' पर बैठे 44 सांसदों के ख़िलाफ़ शिकायतें राष्ट्रपति के पास पहुँच गई हैं. इनमें सोनिया गाँधी, कर्ण सिंह से लेकर सोमनाथ चटर्जी तक कई महत्वपूर्ण नाम शामिल हैं. हालांकि सत्रावकाश करने की बजाय सत्रावसान करने के पीछे सरकार ने सफ़ाई देते हुए कहा है कि बजट सत्र के शेष हिस्से में कोई सरकारी कामकाज शेष न होने की वजह से ऐसा किया जा रहा है. सीपीएम का बयान इस मामले में सीपीएम ने गुरुवार को एक बयान जारी करते हुए कहा है कि संविधान के तहत संसद को अधिकार है कि वह 'लाभ के पद' को परिभाषित करे और किसी भी पद को 'लाभ के पद' के दायरे से हटा सके. बयान में कहा गया है, "सीपीएम मानती है कि संसद को तत्काल एक क़ानून बनाना चाहिए और ऐसे कुछ पदों को 'लाभ के पद' के दायरे से बाहर कर देना चाहिए जिन पर कुछ सांसद पदस्थ हैं." पार्टी ने कहा है कि एक सांसद को जनसेवा करते हुए कई ज़िम्मेदारियों का निर्वहन करना पड़ता है और ऐसे में यह ठीक नहीं होगा कि सभी पदों को 'लाभ का पद' मान लिया जाए. हालांकि सरकार की ओर से अध्यादेश लाए जाने पर पार्टी का मत पूछे जाने पर कोई सीधा जवाब नहीं मिला. उल्लेखनीय है कि लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी सहित सीपीएम के भी कई सांसद लाभ के पद के दायरे में आ रहे हैं. सीपीएम ने समाजवादी पार्टी (एसपी) की सांसद जया बच्चन की सदस्यता समाप्त किए जाने के फ़ैसले को दुर्भाग्यजनक बताया है. अमरसिंह का इस्तीफ़ा नहीं जया बच्चन को राज्यसभा की सदस्यता के लिए अयोग्य क़रार दिए जाने के बाद समाजवादी पार्टी के ही सांसद अमर सिंह ने भी इस्तीफ़ा देने का प्रस्ताव किया था. लेकिन पार्टी की ओर से कहा गया है कि अमर सिंह राज्यसभा की अपनी सदस्यता से इस्तीफ़ा नहीं देंगे. उल्लेखनीय है कि जिन सांसदों के ख़िलाफ़ 'लाभ के पद' पर होने की शिकायतें हैं उनमें अमरसिंह भी शामिल हैं. संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद समाजवादी पार्टी ने यूपीए सरकार की अध्यादेश लाने की कोशिशों की निंदा की है. अध्यादेश की चर्चा इस बीच यह चर्चा चल ही रही है कि यूपीए सरकार एक अध्यादेश लाकर कई महत्वपूर्ण सांसदों की सदस्यता बचाने में लगी हुई है.
माना जा रहा है कि यूपीए सरकार चाहती है कि इस तकनीकी दिक्क़त को दूर करने के लिए एक क़ानून बनाकर कुछ पदों को लाभ के पद से अलग कर दिया जाए. इसके लिए सरकार एक अध्यादेश लाना चाहती है. संविधान की धारा 123 के अनुसार अध्यादेश लाने के लिए ज़रूरी है कि संसद का सत्र न चल रहा हो. यदि परंपरा के अनुसार बजट सत्र का सत्रावकाश होता तो सरकार अध्यादेश नहीं ला सकती थी क्योंकि इसे तकनीकी रुप से माना जाता है कि संसद का सत्र जारी है. इसलिए सरकार ने कामकाज न होने का तर्क देकर सत्रावसान कर दिया है. अब यूपीए सरकार अध्यादेश लाने के लिए स्वतंत्र हो गई है जिसे छह महीने के भीतर कभी भी संसद में रखकर पास करवाना होगा. हालांकि अध्यादेश के मामले में सरकार ने अभी चुप्पी साधी हुई है. इसे लेकर बुधवार को संसद में विपक्ष की ओर से जमकर हंगामा किया गया था और दोनों सदनों की बैठकें कई बार स्थगित करनी पड़ी थी. | इससे जुड़ी ख़बरें संसद का सत्र बीच में ही ख़त्म23 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस एनडीए ने राष्ट्रपति से हस्तक्षेप को कहा22 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस 'लाभ के पद' को लेकर संसद में हंगामा22 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस जया बच्चन राज्यसभा के अयोग्य क़रार17 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस मैं इस्तीफ़ा देना चाहता हूं: अमर सिंह17 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस जया के बाद अब अमर सिंह पर संकट10 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस जया बच्चन की सदस्यता संकट में07 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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