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मैं इस्तीफ़ा देना चाहता हूं: अमर सिंह | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
समाजवादी पार्टी नेता और राज्यसभा सांसद अमर सिंह लाभ के पद पर रहते हुए किसी भी सदन की सदस्यता लेने के मुद्दे पर कांग्रेस समेत सभी दलों से कहा है कि वो अपने ऐसे नेताओं से इस्तीफ़ा देने के लिए कहें. अमर सिंह ने कहा है कि वह अपने पद से इस्तीफ़ा देना चाहते हैं लेकिन उन्हें पार्टी ने रोक रखा है. निर्वाचन आयोग की सिफ़ारिश पर सपा की राज्यसभा सांसद जया बच्चन की सदस्यता ख़त्म किए जाने के बाद अमर सिंह ने यह घोषणा की है. उल्लेखनीय है कि अमर सिंह को भी लाभ के पद पर होने के कारण चुनाव आयोग ने नोटिस दिया है. शुक्रवार की देर शाम एक संवाददाता सम्मेलन में अमर सिंह ने कहा " मैं अपना इस्तीफ़ा लेकर उपराष्ट्रपति के पास गया था लेकिन रास्ते में मुझे मुलायम सिंह जी का फोन आया और उन्होंने कहा कि मैं सपा संसदीय बोर्ड के फ़ैसले का इंतज़ार करुं. " अमर सिंह ने यह नहीं बताया कि संसदीय बोर्ड की बैठक कब होगी लेकिन कहा कि वो चाहेंगे कि यह बैठक जल्दी हो. उन्होंने इस्तीफ़े की पेशकश तो की लेकिन साथ ही कांग्रेस समेत सभी दलों से कहा कि वो अपने ऐसे सभी नेताओं से इस्तीफ़ा देने के लिए कहें. उन्होंने सोनिया गांधी और कर्ण सिंह का नाम लिया और कहा कि ये नेता भी लाभ के पद पर बने हुए हैं इसलिए उन्हें भी राष्ट्रपति और निर्वाचन आयोग के निर्देशों का पालन करते हुए सदन की सदस्यता से त्यागपत्र देना चाहिए. उल्लेखनीय है कि सोनिया गांधी राजीव गांधी फाउंडेशन और इंदिरा गांधी ट्रस्ट की अध्यक्ष है. इसी तरह कर्ण सिंह भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के प्रमुख है. जया बच्चन का मुद्दा जया बच्चन के मामले में अमर सिंह ने साफ कहा कि जब कभी इस सीट पर उपचुनाव होंगे तो उम्मीदवार जया बच्चन ही होंगी. जया बच्चन की तारीफ़ करते हुए उन्होंने कहा कि वो किसी परिवार की अनुकंपा पर सांसद नहीं बनी थीं और समाजवादी पार्टी उन्हें एक बार फिर राज्यसभा से लाएगी. शुक्रवार को ही सपा ने अपने राज्यसभा उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की है लेकिन जया बच्चन की बर्खास्तगी की ख़बर देर से आने के कारण उनका नाम इस सूची में नहीं रखा जा सका. जया बच्चन राज्यसभा सांसद होते हुए भी उत्तर प्रदेश फ़िल्म विकास निगम की चेयरमैन रही हैं और इसी कारण उनकी सदस्यता समाप्त कर दी गई है. आयोग ने इस संबंध में जया बच्चन को नोटिस जारी किए थे जिसके बाद जया बच्चन ने सुप्रीम कोर्ट का सहारा लिया था. जया बच्चन का कहना है कि चेयरमैन के पद पर रहते हुए उन्होंने वेतन नहीं लिया है इसलिए वो लाभ का पद नहीं है. चुनाव आयोग को कांग्रेस के एक नेता मदनमोहन शुक्ला की ओर से एक शिकायत मिली थी जिसमें उन्होंने आयोग से जया बच्चन के लाभ के पद पर होने के कारण अयोग्य घोषित करने का अनुरोध किया था. उलझा मामला इसी दौरान उत्तर प्रदेश विधानसभा में एक विधेयक पारित किया गया जिसके तहत ऐसे 79 पदों को लाभमुक्त क़रार दिया गया है. हालांकि यह विधेयक अभी प्रभावी नहीं हो सका है और क्योंकि उत्तर प्रदेश के राज्यपाल टीवी राजेश्वर ने इसे मंज़ूरी नहीं दी है. जया बच्चन के बाद आयोग ने समाजवादी पार्टी के सांसद और महासचिव अमर सिंह को भी ऐसा ही नोटिस जारी किया गया है. अमर सिंह राज्यसभा सांसद होते हुए भी उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास बोर्ड के चेयरमैन हैं और इसी कारण उन्हें भी नोटिस दिया गया है. समाजवादी पार्टी के प्रमुख और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह ने इसे साजिश करार दिया था और कहा था कि पार्टी इसका जवाब देगी. संविधान के तहत राष्ट्रपति चुनाव आयोग से विचार विमर्श कर किसी सांसद की योग्यता पर फ़ैसला करता है. | इससे जुड़ी ख़बरें जया बच्चन की सदस्यता संकट में07 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस जया के बाद अब अमर सिंह पर संकट10 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस जया बच्चन राज्य सभा की उम्मीदवार12 जून, 2004 | भारत और पड़ोस उत्तर प्रदेश का विधायक अयोग्य क़रार20 मई, 2005 | भारत और पड़ोस मेरे साथ बहुत बुरा बर्ताव हुआ: अमर29 जुलाई, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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