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उत्तर प्रदेश का विधायक अयोग्य क़रार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर प्रदेश के राज्यपाल टीवी राजेश्वर ने सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी के विधायक उदय भान सिंह को सदन की सदस्यता से अयोग्य क़रार दे दिया है. औराई से विधायक उदय भान सिंह को हत्या के आरोप में दोषी क़रार दिया गया है जिसके आधार पर उन्हें विधान सभा की सदस्यता से अयोग्य क़रार दिया गया है. ग़ौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की ही सरकार है और उदय भान सिंह औराई से विधायक हैं जो पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्राचीन शहर वाराणसी के नज़दीक है. उदय भान सिंह और दस अन्य लोगों पर आरोप था कि उन्होंने अप्रैल 1999 में तीन लोगों की हत्या की थी. एक सत्र न्यायालय ने 2004 में उन्हें दोषी पाते हुए उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई थी. उदय भान सिंह इस वक़्त जेल में हैं. इस सज़ा को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बहाल रखा था. उसके बाद मृतक के परिवार ने राज्यपाल से उदय भान सिंह को विधान सभा की सदस्यता से अयोग्य क़रार देने की अपील की थी. राजभवन के सूत्रों का कहना है कि उदय भान सिंह की सज़ा की चूँकि उच्च न्यायालय से पुष्टि हो चुकी है और उसे सर्वोच्च न्यायालय से स्थागनादेश नहीं मिला है, ऐसी स्थिति में उदयभान सिंह की सज़ा बरक़रार है. राज्यपाल ने इस मामले पर निर्वाचन आयोग की सलाह माँगी थी जिसने उदय भान सिंह की सज़ा को देखते हुए अयोग्य क़रार देने की सिफ़ारिश की थी. राज्य सरकार के अधिकारियों ने कहा है कि उदय भान सिंह को निर्वाचन आयोग की सिफ़ारिश पर ही अयोग्य क़रार दिया गया है. भारत में क़ानून में व्यवस्था है कि कोई भी अभियुक्त अपने पद पर तब तक बने रह सकता है जब तक कि उसे दोषी क़रार नहीं दिया जाता. क़ानून यह भी कहता है कि अगर किसी को दो साल से ज़्यादा की जेल की सज़ा दी जाती है तो वह विधान सभा या संसद की सदस्यता के योग्य नहीं रह जाता है. कुछ मामलों में ऐसा भी देखा गया है कि इस तरह के अभियुक्त विधायक अपना कार्यकाल पूरा करने में कामयाब हो जाते हैं क्योंकि अदालती प्रक्रिया में वर्षों का समय लग जाता है. |
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