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रविवार, 28 मई, 2006 को 06:31 GMT तक के समाचार
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सभी राज्यों में आईआईएम खोले जाएं
विरोध
छात्र पूरी आरक्षण प्रणाली की समीक्षा चाहते हैं
भारत की एक संसदीय समिति ने देश के सभी राज्यों में भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) की शाखाएं खोलने का सुझाव दिया है.

इस बीच उच्च शिक्षण संस्थानों में अन्य पिछड़े वर्गों को 27 फ़ीसदी आरक्षण देने के विरोध में डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों की हड़ताल रविवार को भी जारी है.

संसद में मानव संसाधन मंत्रालय की स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सभी राज्यों में कम से कम एक आईआईएम खोलने के साथ ही मौजूदा संस्थानों में सीटें बढ़ाने से छात्रों के लिए अवसर बढ़ेंगे.

समिति ने आईआईएम में शिक्षकों की कमी पर चिंता जताते हुए कहा है कि इस पर अविलंब ध्यान देने की ज़रुरत है.

रिपोर्ट कहता है “हमें इस बात पर हैरानी होती है कि आईआईएम प्रबंधनों को रिक्त पदों के लिए नियुक्तियां करने से कौन रोक रहा है क्योंकि मानव संसाधन मंत्रालय के मुताबिक प्रशिक्षित और योग्य शिक्षकों की कमी नहीं है.”

संसदीय समिति ने अपनी सिफ़ारिश में कहा है कि सरकार को आईआईएम प्रबंधन के साथ मिल कर ऐसी योजना तैयार करनी चाहिए जिससे ये संस्थान सामान्य कामकाज़ के लिए सरकारी सहायता पर निर्भर न रह सकें.

विरोध

उधर ओबीसी को आरक्षण के ख़िलाफ़ यूथ फॉर इक्वलिटी के बैनर तले जूनियर डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों की हड़ताल रविवार को 17 वें दिन भी ज़ारी है.

आंदोलनकारी छात्र
मडिकल छात्रों की हड़ताल का 17 वां दिन है

शनिवार को राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में आरक्षण विरोधियों की एक बड़ी रैली के बाद यूथ फॉर इक्वलिटी के प्रवक्ता डॉक्टर कुमार हर्ष ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि आंदोलन आगे भी जारी रहेगा.

उन्होंने कहा “हम पिछले 16 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं. सरकार हमारे रुख़ को नहीं समझ रही है. इसलिए जब तक हमारी मांगें नहीं मानी जाती आंदोलन जा़री रहेगा.”

बातचीत विफल

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शुक्रवार को हड़ताली छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाक़ात की थी और कहा था कि उच्च शिक्षा संस्थानों में आरक्षण से हुई कमी की भरपाई के लिए सीटें बढ़ाई जाएंगी.

लेकिन प्रधानमंत्री का यह वादा हड़ताली छात्रों को शनिवार की रैली रद्द करने पर राज़ी नहीं कर सका. ये डॉक्टर और मेडिकल छात्र आरक्षण बढ़ाए जाने की योजना के विरोध में पिछले क़रीब एक पखवाड़े से हड़ताल कर रहे हैं जिससे अस्पतालों में सेवाओं पर असर पड़ा है.

शुक्रवार को ही स्वास्थय सचिव पीके होता के साथ भी छात्रों की बातचीत विफल रही. शनिवार को आंदोलन कर रहे छात्रों ने केन्द्रीय मंत्री ऑस्कर फर्नांडीस से मुलाकात कर यह शिकायत दर्ज़ कराई कि होता ने उनके समक्ष कोई ठोस प्रस्ताव नहीं रखा.

ये छात्र सरकार से उच्च शिक्षण संस्थानों में सीटें बढ़ाने का लिखित आश्वासन चाहते हैं और पूरी आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा के लिए ग़ैर राजनीतिक आयोग के गठन की मांग कर रहे हैं.

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