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सोमवार, 05 मई, 2008 को 16:26 GMT तक के समाचार
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ऊँची उड़ान के लिए ऊँची जाति ज़रूरी नहीं

एयर होस्टेस
ट्रेनिंग के बाद लड़कियों को कई विदेशी कंपनियाँ भी नौकरियाँ दे रही हैं
रंजीता कोथल के ख़्वाबों को पर लग गए हैं. 21 साल की रंजीता एयर अरबिया में लगभग एक लाख रुपए महीना कमा रही है.

जबलपुर नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग में काम करने वाले उसके पिता के लिए भी ये बड़ी बात है कि उनकी बेटी इतने कम वक़्त में इतना कमा रही है जबकि वह बीए पास भी नहीं है.

रंजीता की तरह ही मध्य प्रदेश के दूर दराज़ इलाक़ों से आई 30 अन्य लड़कियों के लिए भी आसमान में उड़ान भरना अब बहुत मुश्किल नही है जबकि ज़मीन पर उनके लिए ऊँची जाति वालों की बराबरी करना एक कठिन सपना रहा है.

ये सभी लड़कियाँ एयर होस्टेस की ट्रेनिंग ले रही है. इस ट्रेनिंग के लिए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सहायता राशि मुहैया कराई है.

17 साल की सोनम मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के मुलताई से ताल्लुक़ रखती है. उनके किसान पिता को इस काम के बारे में जरा सी भी जानकारी नही थी. अख़बार में सरकार की इस योजना के बारे में पढ़ने के बाद वो इसके बारे में पता लगाने सीधे भोपाल आ गए.

पिछड़े वर्ग की मनीषा करयाम कहती है, "पहले तो मेरे माता पिता इसके ख़िलाफ़ थे, पर अब वो ख़ुश है."

 हम चाहते हैं कि आदिवासी और पिछड़े वर्ग की लड़कियाँ मुख्य धारा में आएँ. बारहवीं पास करने के बाद बहुत सी लड़कियों के पास कोई काम नही है और उन्हें इस के बारे में बहुत कम जानकारी है
एसएस कुमरे

आख़िर ऐसी क्या बात थी जिसने उनकी सोच में ये बदलाव लाया. वो कहती है, "अब मैं अच्छी अंग्रेज़ी बोलती हूँ, इससे वो खुश हैं."

मध्य प्रदेश के विमानन विभाग में उपसचिव एसएस कुमरे बताते हैं कि मध्य प्रदेश की सरकार हर एक लड़की के लिए एक लाख रुपए दे रही है.

वो कहते है, "हम चाहते है कि आदिवासी और पिछड़े वर्ग की लड़कियाँ मुख्यधारा में आएँ. बारहवीं पास करने के बाद बहुत सी लड़कियों के पास कोई काम नही है और उन्हें इस के बारे में बहुत कम जानकारी है."

सामाजिक दायित्व

मध्य प्रदेश सरकार के साथ काम कर रही एयर होस्टेस की ट्रेनिंग देने वाली संस्था फ्रेंकफिन के संचालक अरुण गुप्ता कहते है कि हमने सामाजिक दायित्व और एक चुनौती के तौर इस काम को करने के लिये प्रदेश सरकार से करार किया है.

इन लड़कियों को ट्रेनिंग देने वाली रितु सिंह कहती है कि इन लड़कियों को दूसरी लड़कियों के साथ मिलने में किसी भी तरह की परेशानी नही आई है.

इशा
क़तर एयरवेज़ ने इशा को नौकरी दी है

वो मानती है, "कुछ दिक्क़ते है जैसे अंग्रेजी और सामान्य ज्ञान की. लेकिन ये सब वो चीज़े है जो सिखाई जा सकती है."

इशा भी अब कतर एयरवेज़ में नौकरी कर रही हैं और वह आठ लाख रुपए सालाना कमा रही हैं.

मंडला की आदिवासी सुप्रिया धुर्वे कहती है कि उनका आत्म विश्वास इसी बात से बढ़ जाता है कि वो एयर होस्टेस की ट्रेनिंग प्राप्त कर रही है. वो कहती है, "मैंने हिंदी माध्यम से पढ़ाई की है और मुझे इस बात का नही पता कि एयर होस्टेस को क्या-क्या करना होता है. आज मैंने लोगों को ड्रिंक्स देने के बारे में सीखा है."

लेकिन क्या यहां ट्रेनिंग ले रही सभी लड़कियों को नौकरी मिल रही है? अरुण गुप्ता कहते है, "इस क्षेत्र में अपार संभावनाएँ हैं. ये ज़रुरी नही है कि हर किसी को एयर होस्टेस की नौकरी ही मिले पर हाँ होटल या ग्राउंड स्टाफ़ के तौर पर भी इन्हें नौकरी मिल रही है."

प्रदेश के अलग अलग इलाक़ों से आने वाली इन लड़कियों को अब हर चीज़ मिल रही है, जिसके ख्वाब इन्होंने देखे होंगे- ग्लैमर, शोहरत और पैसा.

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