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हवाईअड्डों पर हड़ताल का मिलाजुला असर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दिल्ली और मुंबई हवाईअड्डों के निजीकरण के विरोध में हज़ारों हवाईअड्डा कर्मियों ने अपनी घोषणा के अनुसार बुधवार को देशव्यापी हड़ताल कर दी जिसका मिलाजुला असर देखने को मिला. हड़ताल के कारण कोलकाता में दोपहर बाद की हवाई सेवाएँ पूरी तरह से ठप्प-सी हो गईं वहीं दिल्ली में भी विमान सेवाएँ प्रभावित हुईं. हालांकि मुंबई में विमान सेवाओं पर ज़्यादा असर पड़ता नज़र नहीं आया और दोपहर बाद स्थितियां कुछ सामान्य होती नज़र आईं. हड़ताल शुरू करते हुए कर्मचारियों ने बुधवार की सुबह से काम रोक दिया था जबकि कई अधिकारी भूख हड़ताल पर चले गए हैं. इस हड़ताल से देश भर में उड़ानों पर असर पड़ा है. हालांकि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) ने दावा था कि इसका उड़ानों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. एयर टैफ़िक कंट्रोल के कर्मचारी हालांकि हड़ताल पर नहीं हैं लेकिन उन्होंने एएआई कर्मचारियों का साथ देने की घोषणा की है. मंगलवार को निविदाएँ खोलने के बाद नागरिक विमानन और उड्डयन मंत्रालय ने दिल्ली और मुंबई के हवाईअड्डों को निजी हाथों में देने की घोषणा की थी. विरोध सरकार के इस क़दम का वामपंथी दल भी विरोध कर रहे हैं. वामपंथी नेता और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो की सदस्य, वृंदा कारत ने बीबीसी को बताया, "उड्डयनमंत्री ने कहा है कि मुंबई और दिल्ली के हवाईअड्डों को निजी हाथों में सौंपा जा रहा है जबकि बाक़ी हवाईअड्डों की ज़िम्मेदारी भारतीय विमान प्रधिकरण के पास ही होगी. इससे साफ़ है कि प्राधिकरण हवाई अड्डों का आधुनिकीकरण कर पाने की क्षमता रखता है." हड़ताल के चलते हवाई अड्डों पर भारी सुरक्षा बंदोबस्त किए गए हैं. हालांकि दिल्ली और मुंबई के हवाईअड्डों पर कर्मचारियों ने उग्र प्रदर्शन किया जिसके चलते पुलिस को लाठीचार्ज भी करना पड़ा. दिल्ली और मुंबई हवाई अड्डे के सामने कर्मचारी एकत्रित होकर सरकार के ख़िलाफ़ नारे लगा रहे हैं. कर्मचारियों का कहना है कि जब तक सरकार हवाई अड्डों के निजीकरण का अपना निर्णय वापस नहीं ले लेती, हड़ताल करते रहेंगे. असर वामपंथी सरकार वाले राज्य कोलकाता में इसका सबसे ज़्यादा असर देखने को मिला. तमाम विमान सेवाएं रद्द कर दी गई और कुछ विमानों को तो उतरने का भी मौका नहीं मिला. कई लोगों के सामान विमानों में रखे जाने के लिए अंदर जा चुके थे पर हड़ताल के चलते सामान न तो लोगों को वापस मिल रहा था और न ही लोग हवाईअड्डों से निकल पा रहे थे. आलम यह था कि सभी कैंटीन और रेस्टोरेंट तक बंद थे जिसके कारण यात्रियों को और भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. हालांकि मुंबई में दोपहर तक पुलिस और कर्मचारियों के बीच हुई झड़पों के बाद हालात सामान्य होने लगे और स्थिति नियंत्रण में आ गई. दिल्ली में भी हड़ताल के चलते यात्रियों को काफ़ी परेशानी हुई और उड़ानों का समय भी प्रभावित हुआ. विमानन मंत्री प्रफ़ुल्ल पटेल ने कर्मचारियों को आश्वासन दिया है कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि निजीकरण के बाद भी उनके हितों पर कोई आँच न आए. उन्होंने हड़ताल कर रहे कर्मचारियों के ख़िलाफ़ हड़ताल निरोधक क़ानून लागू करने से भी इंकार कर दिया है. | इससे जुड़ी ख़बरें हवाईअड्डा निजीकरण को मंज़ूरी01 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस निजीकरण के विरोध में हड़ताल 31 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस हवाई अड्डों के ठेकों का फ़ैसला31 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस हवाईअड्डा कर्मियों की हड़ताल की धमकी30 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस हवाईअड्डा निजीकरण की निविदाएँ30 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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