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हवाई अड्डों के ठेकों का फ़ैसला | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दिल्ली और मुंबई के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के आधुनिकीकरण के ठेकों की घोषणा कर दी गई है. दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का ठेका जीएमआर-फ्रैपोर्ट को मिला है जबकि मुंबई का ठेका जीवीके-साउथ अफ्रीका को. इस मामले पर निर्णय लेने के लिए गठित कैबिनेट की विशेष समिति की मंज़ूरी मिलने के बाद नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने इसकी घोषणा की. इन आधुनिकीकरण परियोजनाओं के लिए रिलायंस सहित कई अन्य कंपनियों ने भी अपनी निविदाएँ दी थीं. जीएमआर-फ्रैपोर्ट दक्षिण भारत की एक कंपनी है जिसकी साझीदारी एक जर्मन कंपनी के साथ है जबकि जीवीके की साझीदारी दक्षिण अफ्रीकी कंपनी के साथ है. भारी विवाद मंगलवार को कड़ी सुरक्षा के बीच नागरिक उड्डयन मंत्रालय के मुख्यालय में सीलबंद निविदाएँ खोली गईं. वामपंथी कामगार संगठनों से जुड़े भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के सैकड़ों कर्मचारी इस फ़ैसले के विरोध में अपने दफ़्तरों को छोड़कर सड़कों पर निकल आए. इन कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इस क़दम का असली मक़सद इन दोनों महत्वपूर्ण हवाई अड्डों का पूर्ण निजीकरण है. सरकार ने चेतावनी दी है कि हड़ताल करने वाले कर्मचारियों के ख़िलाफ़ आवश्यक सेवा क़ानून यानी एस्मा लगाया जा सकता है, एस्मा लगने की स्थिति में हड़ताल करना ग़ैर क़ानूनी हो जाएगा. इसके जवाब में कर्मचारी संगठनों का कहना है कि अगर सरकार ने ऐसा किया तो वे देशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल करेंगे. मुंबई से बीबीसी संवाददाता ज़ुबैर अहमद ने बताया है कि कर्मचारियों के विरोध की वजह से हवाई अड्डों पर यात्रियों की काफ़ी परेशानी का सामना करना पड़ा. कई उड़ानें अपने नियत समय से देर से उड़ीं लेकिन किसी उड़ान के रद्द होने की ख़बर नहीं है. | इससे जुड़ी ख़बरें हवाईअड्डा कर्मियों की हड़ताल की धमकी30 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस वामपंथी लौटेंगे यूपीए की बैठकों में13 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस हवाई अड्डा कर्मचारियों की हड़ताल ख़त्म29 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस एयर इंडिया का विमान रनवे से उतरा30 जुलाई, 2005 | भारत और पड़ोस एयरपोर्ट कर्मचारी हड़ताल पर | भारत और पड़ोस विदेशी एयरलाइंस पर बक़ाया | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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