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वामपंथी लौटेंगे यूपीए की बैठकों में | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
केंद्र सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामपंथी दलों ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की समन्वय समिति की बैठकों में फिर से जाने का फ़ैसला किया है. विनिवेश के विरोध में जून से वे इसका बहिष्कार कर रहे थे. गुरुवार को वामपंथी दलों ने एक बैठक के बाद इसका फ़ैसला किया है. यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने वामपंथी दलों को एक पत्र लिखकर यूपीए की बैठकों में शामिल होने का अनुरोध किया था. फ़ैसला उल्लेखनीय है कि भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) के विनिवेश के सरकार के फ़ैसले का विरोध करते हुए वामपंथी दलों ने 26 जून को कहा था कि वे यूपीए की बैठक का बहिष्कार करेंगे. उन्होंने इसे लेकर सोनिया गाँधी को एक पत्र भी भेजा था. वामपंथी दलों की बैठक के बाद सीपीएम नेता प्रकाश कारत और सीपीआई नेता एबी बर्धन ने पत्रकारों को बताया कि वामपंथी दलों के पत्र के जवाब में सोनिया गाँधी ने आश्वासन दिया है कि सरकार भेल के शेयरों का विनिवेश का कदम नहीं उठा है. उन्होने कहा कि प्रधानमंत्री पहले ही कह चुके हैं कि लाभ देने वाले सार्वजनिक क्षेत्रों के उपक्रमों यानी नवरत्नों के विनिवेश का कोई विचार नहीं है. वामपंथी दलों ने कहा है, "इसे ध्यान में रखते हुए हमने निर्णय लिया है कि समन्वय समिति की बैठक में लोटेंगे." वामपंथी दलों का कहना था कि न्यूनतम साझा कार्यक्रम के अनुसार लाभ देने वाले सार्वजनिक क्षेत्रों के उपक्रमों का विनिवेश नहीं किया जाएगा. इसके बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गाँधी ने वामपंथी दलों के नेताओं से कई बैठकें की थीं और बाद में सरकार ने भेल का विनिवेश रोकने की घोषणा की थी. हालांकि केंद्र सरकार की कई नीतियों से वामपंथी दलों का विरोध है ख़ासकर ईरान के मामले में, और नेता इसे स्वीकार भी करते हैं, लेकिन वे यूपीए की बैठकों में लौटने को तैयार हो गए हैं. |
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