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हवाईअड्डा निजीकरण की निविदाएँ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दिल्ली और मुंबई के हवाई अड्डों के निजीकरण के लिए मंगलवार को निविदाएं खोले जाने की संभावना है. इसके पहले उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने 29 जनवरी को घोषणा की थी कि मंत्रियों के एक ग्रुप ने 5400 करोड़ रुपए की निजीकरण को लेकर अंतिम निर्णय ले लिया है. लेकिन उस दौरान इसकी घोषणा नहीं की गई थी. ग़ौरतलब है कि भारत सरकार दिल्ली और मुंबई हवाई अड्डों के आधुनिकीकरण के लिए इनका निजीकरण करने जा रही है और इसके लिए सरकार ने निजी कंपनियों से निविदाएँ आमंत्रित की थीं. दूसरी ओर निजीकरण का विरोध कर रहे कर्मचारियों ने कहा है कि यदि सरकार ऐसा क़दम उठाती है तो वे देशव्यापी हड़ताल करेंगे. भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण या हवाईअड्डा प्राधिकरण के कर्मचारियों और भारतीय विमानन मंत्री प्रफुल्ल पटेल के बीच सोमवार को हुई बातचीत का भी कोई परिणाम नहीं निकला. हवाईअड्डा प्राधिकरण के कर्मचारी निजीकरण का विरोध करते हुए कह रहे हैं कि प्राधिकरण को ही दोनों हवाई अड्डों के आधुनिकीकरण का अधिकार दिया जाना चाहिए. कर्मचारी संगठन के संयोजक एमके घोषाल ने कहा, "यदि सरकार निजीकरण की दिशा में आगे बढ़ती है तो हम देश के सारे हवाईअड्डे बंद करने पर विचार करेंगे." इसके पहले भी कर्मचारी निजीकरण के विरोध में हड़ताल पर जा चुके हैं. उन्होंने कहा कि अभी तक कर्मचारियों ने हवाई अड्डों पर कोई बाधा नहीं पहुँचाई है लेकिन यदि सरकार ने कर्मचारियों की आवाज़ नहीं सुनी तो उनके पास कोई चारा नहीं बचेगा. कर्मचारी नेताओं का कहना है कि दिल्ली, मुंबई के अलावा अन्य हवाई अड्डों के आधुनिकीकरण के लिए शेयर बाज़ार से आसानी से धन जुटाया जा सकता है. | इससे जुड़ी ख़बरें हवाईअड्डा कर्मियों की हड़ताल की धमकी30 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस वामपंथी लौटेंगे यूपीए की बैठकों में13 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस हवाई अड्डा कर्मचारियों की हड़ताल ख़त्म29 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस एयर इंडिया का विमान रनवे से उतरा30 जुलाई, 2005 | भारत और पड़ोस एयरपोर्ट कर्मचारी हड़ताल पर | भारत और पड़ोस विदेशी एयरलाइंस पर बक़ाया | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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