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शुक्रवार, 25 अप्रैल, 2008 को 17:35 GMT तक के समाचार
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'प्लीज़, हमारे पापा को रिहा कर दीजिए'

सरबजीत सिंह की बेटी स्वप्नदीप बहुत छोटी थीं जब वह पिता से बिछुड़ीं
पाकिस्तान में फाँसी की सज़ा का सामना कर रहे भारतीय नागरिक सरबजीत सिंह की बेटी स्वपनदीप ने पाकिस्तान सरकार और जनता से आग्रह किया है कि उनके पिता निर्दोष हैं और उन पर रहम करके उन्हें रिहा कर दिया जाए.

सरबजीत सिंह की 21 वर्षीय बेटी स्वपनदीप ने बीबीसी से बातचीत करते हुए कहा कि वे अपने पिता के प्यार से वंचित रही हैं.

उन्होंने कहा, “मेरे पापा ने 18 साल बड़ी मुश्किल से बिताए हैं, मेरे पास शब्द नहीं है अपने पापा के दुख को बयान करने के लिए.” उनका कहना था कि बच्चों वाले समझ सकते हैं कि बाप के बिना बच्चों की क्या हालत होती है.

स्वपनदीप ने कहा, "मैं आम जनता से यही उम्मीद रखती हूँ कि वे हमारे दुख को समझते हुए, हमारे पापा पर रहम कर उन्हें हमारे पास भेज दें, मेरे पापा ने आजीवन कारावास से भी अधिक सज़ा काट ही ली है.”

 मैं आम जनता से यही उम्मीद रखती हूँ कि वे हमारे दुख को समझते हुए, हमारे पापा पर रहम कर उन्हें हमारे पास भेज दें, मेरे पापा ने आजीवन कारावास से भी अधिक सज़ा काट ही ली है

स्वपनदीप और उनकी बहन पूनम ने गुरूवार को अपने पिता से लाहौर की कोट लखपत जेल में मुलाक़ात की.

पूनम तो पहली बार ही अपने पिता से मिल रही थीं जबकि स्वपनदीप तब बहुत छोटी थी जब उसके पिता बिछुड़े थे.

1990 में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के चार शहरों में हुए बम धमाकों में 14 लोग मारे गए थे. इन धमाकों में सरबजीत की कथित भूमिका के लिए पाकिस्तान की अदालत ने उन्हें मौत की सज़ा सुनाई थी.

सुप्रीम कोर्ट ने भी कुछ साल पहले सरबजीत सिंह को मौत की सज़ा सुनाई थी और एक मई को उन्हें फाँसी देने की घोषणा की गई है.

स्वपनदीप और पूनम गुरुवार को अपने पिता से मुलाक़ात बाद जब जेल से बाहर निकलीं तो अपने आँसू रोक नहीं पा रही थीं.

स्वपनदीप ने बताया, “मेरा बिल्कुल मन नहीं कर रहा था वहाँ से आने को, मेरा मन कर रहा था कि या तो मैं जैल में रह पाऊँ या पापा मेरा साथ चलें.”

अनुरोध

उन्होंने कहा, “अगर मेरे बस में होता तो मैं पापा को वहाँ एक दिन भी रहने नहीं देतीं और अपने साथ भारत ले जाती.”

 पहले जाते ही उन्होंने मेरा नाम लेकर पुकारा और कहा कि अरे स्वपन तू इतनी बड़ी हो गई है और फिर उन्होंने मेरा और मेरी बहन का माथा चूमा, वह भी बहुत भावुक हो गए थे हमें देख कर

स्वपनदीप का कहना है कि जब वे मुलाक़ात के लिए गुरुद्वारे से निकल रही थी तो उन मन बड़ा घबरा रहा था. उन्होंने कहा, “पता नहीं वह कैसे लग रहे होंगे और किस हालत में होंगे, जब जेल में प्रवेश किया तो दिल कांप रहा था और जब उनको देखा तो दिल को ठेस पहँची कि हमारे पापा किन हालतों में हमारे साथ मिल रहे हैं.”

उन्होंने बताया कि वे भारत से अपने पिता के लिए खाना बना कर लाईं थी लेकिन उन के पास इतना समय था कि केवल बातें ही हो सकी और खाना खाने का वक़्त नहीं मिला.

उन्होंने कहा, “पहले जाते ही उन्होंने मेरा नाम लेकर पुकारा और कहा कि अरे स्वपन तू इतनी बड़ी हो गई है और फिर उन्होंने मेरा और मेरी बहन का माथा चूमा, वह भी बहुत भावुक हो गए थे हमें देख कर.”

स्वपनदीप ने कहा, “मेरे पापा ने अपने केस के बारे में जानकारी दी जो हम पाकिस्तान सरकार से बात करेंगे और भारत सरकार को भी बताएँगे.”

उन्होंने कहा, “मेरे पापा ने बताया कि उन्होंने कोई इक़बाले जुर्म नहीं किया है और यह सब कुछ उन्होंने खुद गढ़ लिया है, ऐसा कुछ नहीं हुआ है और कहा कि केस में कई ख़ामियाँ हैं.”

सरबजीत सिंह की दो बेटियाँ

सरबजीत सिंह का परिवार बुधवार को वाघा सीमा पारकर लाहौर पहँचा था और पाकिस्तान सरकार ने परिवार के पाँच सदस्यों को सात दिनों का वीज़ा दिया है.

पाकिस्तान में मानवाधिकार मामलों के पूर्व मंत्री अंसार बर्नी ने सरबजीत सिंह को बचाने की आख़िरी कोशिशों के तहत राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के पास याचिका भेजी है जिसमें उन्होंने अपील की है कि सरबजीत सिंह की मौत की सज़ा को आजीवन कारावास में बदल दिया जाए या उन्हें रिहा कर दिया जाए.

भारत सरकार ने भी सरबजीत की सज़ा माफ़ करने की अपील की थी और माना जा रहा है कि पाकिस्तान की नई सरकार सरबजीत मामले की समीक्षा कर सकती है.

उधर पाकिस्तान की नई गठबंधन सरकार मौत की सज़ा वाले कैदियों की सज़ा आजीवन कारावास में तब्दील करने पर विचार कर रही है और इस मामले में एक संदेश राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ को भेजा गया है.

माना जा रहा है कि सरकार के नए फैसले से दूसरे क़ैदियों के साथ-साथ सरबजीत सिंह की सज़ा भी आजीवन कारावास में तबदील को सकती है.

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