BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
मित्र को भेजेंकहानी छापें
'पार्टी अपने ही संविधान से भटक गई है'
गोपीनाथ मुंडे
मुंडे ने कहा है कि वो पार्टी का दामन नहीं छोड़ेंगे
महाराष्ट्र में बीजेपी नेता गोपीनाथ मुंडे ने पार्टी से अपील की है है वो उनकी परिस्थिति समझें और मामले को सुलझाएं.

पार्टी के सभी पदों से इस्तीफ़ा देने के बाद मुंडे ने सोमवार को दिनभर कार्यकर्ताओं से मुलाक़ात की है. उनकी ओर से कुछ नेता दिल्ली में आलाकमान से बातचीत करने के लिए भी पहुंचे हैं.

मुंबई के वरली स्थित बीजेपी कार्यालय में मुंडे से बीबीसी संवाददाता सुशील झा ने बातचीत की.

पढ़िए, कुछ प्रमुख अंश-

आपने इस्तीफ़ा क्यों दिया?

मैंने इस्तीफ़ा दिया क्योंकि पार्टी में लोकतंत्र ख़त्म हो गया है. लोकतंत्र के तहत निर्णय नहीं हो रहे हैं.

कौन-सा ऐसा निर्णय है जिसकी तरफ आपका इशारा है.

ऐसे बहुत सारे निर्णय है. मुझे अध्यक्ष पद से हटाया गया. बीजेपी के संविधान के तहत अध्यक्ष को बिना इस्तीफ़े के नहीं हटाया जा सकता है लेकिन ऐसा किया गया. तीन स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया है उसे नहीं माना गया.

इतना ही नहीं मधु चह्वाण को मुंबई का अध्यक्ष बनाया गया और मुझसे इस बारे में पूछा तक नहीं गया. ऐसे और भी बहुत सारे निर्णय हैं.

आप पिछड़ी जाति के नेता हैं और महाराष्ट्र में आपका कद बहुत ऊंचा है. क्या पिछड़ी जाति के होने कारण आपको दरकिनार किया जा रहा है.

 मुझे नहीं लगता कि जाति के कारण ऐसा हुआ है. मुझे तो महाराष्ट्र में सभी लोग अपना नेता मानते हैं चाहे वो किसी भी जाति के हों. असल में कुछ लोग हैं जो बीजेपी पर अपना कब्ज़ा जमाना चाहते हैं. ये किचन कैबिनेट के लोग हैं जो मुझे देखना नहीं चाहते

मुझे नहीं लगता कि जाति के कारण ऐसा हुआ है. मुझे तो महाराष्ट्र में सभी लोग अपना नेता मानते हैं चाहे वो किसी भी जाति के हों. असल में कुछ लोग हैं जो बीजेपी पर अपना कब्ज़ा जमाना चाहते हैं. ये किचन कैबिनेट के लोग हैं जो मुझे देखना नहीं चाहते.

क्या आपका इशारा राजनाथ सिंह या अरुण जेटली की ओर है.

( बीच में सवाल काटते हुए) नहीं नहीं जिनकी मैं बात कर रहा हूँ, वे लोग महाराष्ट्र के हैं. केंद्र के नहीं.

तो क्या आपका इशारा नितिन गडकरी की तरफ है.

मैं किसी का नाम नहीं लेना चाहता.

अगर पार्टी ने आपका इस्तीफ़ा स्वीकार नहीं किया तो आपकी क्या रणनीति होगी.

मैं चाहूंगा कि पार्टी मेरा इस्तीफ़ा मान ले. मैं अगले एक महीने तक पूरे महाराष्ट्र में घूम घूमकर कार्यकर्ताओं से मिलूंगा. उनकी बात सुनूंगा और जानूंगा कि वो क्या चाहते हैं. इसके बाद फ़ैसला करूंगा कि आगे क्या करना है.

आपने बातचीत के लिए दिल्ली जाने से इनकार कर दिया. क्या ये दबाव की राजनीति नहीं है.

नहीं, मैं दबाव की राजनीति नहीं कर रहा हूं. मैं तो यहां कार्यकर्ताओं से मिल रहा हूं. संवाद यात्रा करुंगा. जनमानस को जानूंगा.

अगर आपकी बात नहीं मानी गई और फ़ैसले नहीं बदले गए तो क्या आप पार्टी की सदस्यता से इस्तीफ़ा दे देंगे.

मैं बीजेपी से एक कार्यकर्ता की तरह हमेशा जुड़ा रहना चाहता हूं. मरते दम तक जुड़ा रहूंगा. मैं पार्टी नहीं छोड़ना चाहता.

पार्टी से आपको क्या उम्मीद है.

मैं चाहता हूं कि पार्टी इस पूरे प्रकरण को समझे. हालात को समझे. मेरी परिस्थिति समझे और इसे सही तरीके से सुलझाए.

भारतीय जनता पार्टीशिवसेना-भाजपा रिश्ते
प्रतिभा पाटिल को समर्थन पर दोनों के संबंधों में खटास तो आई है लेकिन...
इससे जुड़ी ख़बरें
महाराष्ट्र भाजपा का संकट गहराया
21 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस
आलोचना से देशमुख की मुश्किलें बढ़ीं
22 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस
राजनाथ सिंह ने किए बड़े बदलाव
29 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस
पुलिस ने परिवारजनों के बयान लिए
27 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>