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'इंसाफ़ मिलने में देरी एक बड़ी चुनौती' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अदालतों में बर्षों से लंबित मामलों की सुनवाई न होने को एक बड़ी चुनौती बताते हुए कहा है कि सरकार 'फैमिली कोर्ट' गठित करने की दिशा में क़दम बढ़ा सकती है. उन्होंने भ्रष्टाचार के मामलों से निपटने के लिए विशेष अदालतों के गठन की ज़रूरत पर ज़ोर दिया. राज्यों के मुख्यमंत्रियों और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वह खुद भी इस सुझाव से सहमत हैं कि भ्रष्टाचार के मामलों से निपटने के लिए विशेष अदालतों का तुरंत गठन किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने उन्हें लिखित सुझाव दिए हैं. इनमें भ्रष्टाचार के मामलों से निपटने के लिए विशेष अदालतों के तत्काल गठन करने की जरूरत का सुझाव भी शामिल है, इससे जनता में न्यायिक प्रणाली के प्रति विश्वास बढे़गा. उन्होंने आगाह किया कि न्याय मिलने में देरी की समस्या से नहीं निपटा गया तो लंबित मामलों की संख्या इतनी अधिक हो जाएगी कि उसके बोझ से समूची न्याय प्रणाली चरमरा सकती है. इस समस्या का हल खोजने के लिए मिले अन्य सुझावों में न्यायिक अधिकारियों और न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाए जाने के सुझाव का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हाल ही में हाई कोर्ट में 152 नए पद सृजित किए गए हैं और सुप्रीम कोर्ट में भी न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाई जाएगी. इस मौके पर मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन ने भारतीय न्यायिक प्रणाली के विश्व में बेहतर होने का दावा करते हुए कहा कि अदालतें देश की आर्थिक प्रगति और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. उनका कहना था कि नागरिकों की सुरक्षा के लिए निष्पक्ष और जवाबदेह न्यायपालिका के साथ पर्याप्त क़ानूनी तंत्र और बुनियादी सुविधाएं भी होनी चाहिए. | इससे जुड़ी ख़बरें 'ओबीसी को आरक्षण ऐतिहासिक क़दम’10 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस 'निजी मामलों पर जनहित याचिका नहीं'07 फ़रवरी, 2008 | भारत और पड़ोस जनहित याचिकाओं पर दिशा-निर्देश14 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस 'टिप्पणी से बँधा नहीं है सुप्रीम कोर्ट'13 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस 'अदालतें सीमाओं का अतिक्रमण न करें'10 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस कार्यकर्ताओं को मौत की सज़ा बरक़रार07 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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