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'अदालतें सीमाओं का अतिक्रमण न करें' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक अहम निर्देश में कहा है कि न्यायिक सक्रियता के नाम पर कार्यपालिका के कार्यों में हस्तक्षेप करना असंवैधानिक है. न्यायमूर्ति एके माथुर और मार्कंडेय काटजू की पीठ ने यह अभूतपूर्व टिप्पणी माली पद पर भर्ती व्यक्ति को पद सृजित कर ड्राइवर के रूप में नियमित करने के कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए सुनाया. पीठ का कहना था कि जजों को अपनी सीमा मालूम होनी चाहिए, वे सरकार चलाने की कोशिश न करें. सर्वोच्च अदालत ने जजों के व्यवहार का ज़िक्र करते हुए कहा उन्हें 'सम्राट' जैसा व्यवहार नहीं करना चाहिए. विधायिका और न्यायपालिका के बीच टकराव के मद्देनज़र सुप्रीम कोर्ट का यह फ़ैसला अहम माना जा रहा है. कोर्ट ने देश-विदेश के विभिन्न फ़ैसलों और बुद्धिजीवियों की टिप्पणियों का उदाहरण दिया है जिसमें न्यायपालिका को सीमा में रहने और सीमाएं लांघने के परिणामों के बारे में चेताया गया है. पीठ ने ध्यान दिलाया कि संविधान में विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की ज़िम्मेदारी स्पष्ट है, इनमें अतिक्रमण से संवैधानिक संतुलन बिगड़ जाएगा. पीठ का कहना था कि अगर क़ानून है तो जज उसे लागू करा सकते हैं लेकिन जज क़ानून बना कर उसे लागू नहीं करा सकते. | इससे जुड़ी ख़बरें न्यायिक परिषद के गठन पर विवाद25 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस न्यायपालिका सीमा में रहे: प्रधानमंत्री08 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस न्यायपालिका बनाम विधायिका की बहस13 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस विधायिका-न्यायपालिका में टकराव बढ़ेगा?11 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस 'सांसदों पर कोर्ट को अधिकार नहीं'08 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस 'आदेशों से संतुलन बिगड़ने का ख़तरा'20 मार्च, 2005 | भारत और पड़ोस नायपॉल पर जेटली का हमला | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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