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गुरुवार, 10 अप्रैल, 2008 को 11:37 GMT तक के समाचार
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'ओबीसी को आरक्षण ऐतिहासिक क़दम’
अर्जुन सिंह
मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह ने उच्चतम न्यायालय के फैसले को ऐतिहासिक बताया है
भारत के मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह ने उच्च शिक्षण संस्थानों में ओबीसी यानी अन्य पिछड़े वर्गों को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का स्वागत किया है, और इसे ऐतिहासिक क़दम बताया है.

उन्होंने कहा कि इस कदम से ओबीसी श्रेणी में आने वाले सैकड़ों छात्रों को फ़ायदा होगा.

अर्जुन सिंह ने कहा कि वो अगले सत्र से इस फ़ैसले को क्रियान्वयन करने के लिए कोशिश करेंगे.

ज़्यादातर राजनीतिक दलो ने इस फ़ैसले का स्वागत किया है. हालांकि कुछ राजनीतिक दलों ने सम्पन्न तबकों यानी क्रीमी लेयर को आरक्षण के दायरे से बाहर रखने के फ़ैसले पर सवाल उठाए हैं.

'ऐतिहासिक'

अर्जुन सिंह ने पत्रकारों से कहा कि बिना प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष के समर्थन के इतना आगे नहीं पहुंच पाए होते.

उन्होंने कहा, "हम उच्चतम न्यायालय के आदेश को पूरा पढ़ेंगे क्योंकि अलग अलग न्यायाधीशों ने टिप्पणियां की हैं, जिनको संज्ञान में लेना होगा. इस लिए हम आदेश की कॉपी का इंतज़ार कर रहे हैं."

उनका कहना था कि जहाँ तक उच्च शिक्षा संस्थानों में मूलभूत सुविधाओं की बात करें तो कुछ संस्थानों में ये सुविधा है, कहीं ये नहीं है.

जब अर्जुन सिंह से पूछा गया कि व्यक्तिगत रूप से उनके लिए ये पूरा सफ़र कितना संघर्षमय रहा है, तो उन्होंने कहा कि राजनीति में व्यक्तिगत कुछ नहीं होता, हाँ राजनीतिक संघर्ष ज़रूर रहा है.

उन्होंने कहा, "जहाँ तक आरक्षण से क्रीमी लेयर को हटाने की बात है, हम इस पर विचार कर रहे हैं और क्योंकि हमारी गठबंधन सरकार है, वे अपने सहयोगियों से विचार विमर्श करेंगे."

उल्लेखनीय अर्जुन सिंह उच्च शिक्षण संस्थानों में ओबीसी छात्रों को आरक्षण दिए जाने की वकालत करते रहे हैं और आरक्षण देने की घोषणा उनके ही कार्यकाल में हुई है.

प्रतिक्रिया

उधर वामपंथी दलों ने भी उच्चतम न्यायालय के इस फ़ैसले का स्वागत किया है.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) ने आरक्षण कोटे से संपन्न लोगों को शामिल नहीं किये जाने का स्वागत करते हुए कहा है कि वे चाहेंगे कि सरकार आगामी सत्र से ये फ़ैसला लागू करे.

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि उच्चतम न्यायालय ने जाति को आर्थिक और शैक्षिक पिछड़ेपन का आधार मान लिया है.

पार्टी महासचिव डी राजा ने कहा है कि नौकरियों के मामले में संपन्न लोगों को आरक्षण देने की बात मान्य हो सकती है. शिक्षा में ऐसा नहीं हो सकता.

डी राजा ने कहा कि सरकार को अब ग़ैर-सरकारी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण के मुद्दे पर ज़ोर देना चाहिए.

फ़ॉरवर्ड ब्लॉक और कांग्रेस की सहयोगी पार्टी भारतीय मुस्लिम लीग ने भी इस फ़ैसले का स्वागत किया है.

लेकिन यूपीए में शामिल लोकजनशक्ति पार्टी के नेता रामविलास पासवान ने कहा है कि क्रीमी लेयर के लोगों को भी आरक्षण का लाभ दिया जाना चाहिए.

उधर एनडीए के घटक दल जनता दल (यूनाइटेड) के नेता शरद यादव ने भी सम्पन्न तबकों के लोगों को आरक्षण से बाहर रखने के फ़ैसले पर सवाल उठाए हैं.

उन्होंने कहा, "यह कोई आर्थिक विकास का कार्यक्रम नहीं है. यह एक नीतिगत फ़ैसला है और इसके लिए संसद ने एकमत से फ़ैसला किया था और इसका उद्देश्य सामाजिक समता था."

मुद्दा

सरकार ने वर्ष 2007 में यह उच्च शिक्षा संस्थानों में पिछड़े वर्ग के लोगों को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का फ़ैसला किया था.

साथ ही आश्वासन दिया था कि पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित सीटें बढ़ाने के बावजूद सामान्य श्रेणी की सीटों की संख्या में कोई कमी नहीं आएगी.

लेकिन इसके ख़िलाफ़ आंदोलन शुरु हो गए थे.

केंद्र सरकार के आरक्षण लागू करने के फ़ैसले का विरोध करते हुए उच्चतम न्यायालय में बहुत सी याचिकाएँ दायर की गई थीं.

इनमें यूथ फॉर इक्वालिटी रेज़िडेंट्स डॉक्टर्स एसोसिएशन, ऑल इंडिया इक्विटी फ़ोरम, अशोक कुमार, शिव खेड़ा और पीवी इंद्रसेन शामिल थे.

केंद्र सरकार का कहना है कि क़ानून बनने के बाद कई केंद्रीय संस्थानों ने ओबीसी के लिए आरक्षित सीटों पर दाखिला देने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी. लेकिन कानून पर स्थगन के बाद यह प्रक्रिया रुक गई थी.

उच्चतम न्यायालय ने सरकार के आरक्षण देने के फ़ैसले पर रोक लगा दी थी, और बाद में केंद्र सरकार के अनुरोध पर इस मामले को संविधान पीठ को सौंप दिया गया था.

न्यायालय ने चिंता ज़ाहिर करते हुए कहा था कि सरकार आरक्षण की नीति पर काम तो कर रही है पर उसके पास ओबीसी को आरक्षण देने के लिए कोई नया और मज़बूत आँकड़ा नहीं है.

बात ये भी उठी कि संपन्न तबकों यानी 'क्रीमी लेयर' को लेकर जो बहस शुरू हुई है उसे भी अप्रासंगिक नहीं माना जा सकता है.

आरक्षण की व्यवस्था से असहमति व्यक्त करने वाले लगातार कहते रहे हैं कि 'क्रीमी लेयर' को आरक्षण की सुविधा नहीं दी जानी चाहिए.

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