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आरक्षण पर कोर्ट का फ़ैसला सुरक्षित | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने उच्च शिक्षण संस्थानों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 27 प्रतिशत सीटे आरक्षित करने के मुद्दे पर संविधान पीठ से सुनवाई कराने के विषय पर अपना फ़ैसला सुरक्षित रखा है. भारत सरकार ने हाल में सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया था कि उच्च शिक्षण संस्थानों में ओबीसी आरक्षण के मुद्दे की सुनवाई संविधान पीठ से कराई जाए. न्यायाधीश अरिजीत पसायत और लोकेश्वर सिंह पांटा ने सभी पक्षों को आठ हफ़्ते का समय दिया है जिसमें वे इस मामले से संबंधित सारी औपचारिकताएँ और कागज़ी कार्रवाई इत्यादी पूरी कर लें. न्यायालय ने राज्यों और मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को इस मामले में आवेदन रखने की इजाज़त दी है. साथ ही सॉलिसिटर जनरल जीई वाहानवति को निर्देश दिया गया है कि केंद्र सरकार और आरक्षण के समर्थकों की मुख्य बाते गुरुवार तक न्यायालय के समक्ष रखें. उधर वकील हरीश साल्वे से कहा गया है कि जो लोग अन्य पिछड़ा वर्ग को उच्च शिक्षण संस्थानों में आरक्षण दिए जाने का विरोध कर रहे हैं, वे उन सभी याचिककर्ताओं की बात न्यायालय के सामने रखें. सुप्रीम कोर्ट ने 29 मार्च को ओबीसी को आरक्षण देने के फ़ैसले पर रोक लगा दी थी. | इससे जुड़ी ख़बरें आरक्षण पर हुई बैठक बेनतीजा रही25 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस आरक्षण मुद्दे पर रणनीति के लिए बैठक25 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस ओबीसी आरक्षण पर रोक हटाने से इनकार23 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस ओबीसी मामले पर सुनवाई 23 अप्रैल को18 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस 'ओबीसी कोटा पर रोक हटाने की अपील'16 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस 'इसी वर्ष से मिले पिछड़ों को आरक्षण'12 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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