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कार्यकर्ताओं को मौत की सज़ा बरक़रार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
तमिलनाडु के धर्मपुरी अग्निकांड मामले में मद्रास उच्च न्यायालय ने अन्नाद्रमुक के तीन कार्यकर्ताओं को मौत की सज़ा के निचली अदालत के फ़ैसले पर मुहर लगा दी है. वर्ष 2002 में हुए इस अग्निकांड में कॉलेज की तीन छात्राओं की झुलसने से मौत हो गई थी. अभियुक्त की अपील को ख़ारिज करते हुए जस्टिस मुरुगेशन और वी. पेरिकरुप्पैया ने सेलम के प्रथम अतिरिक्त ज़िला और सत्र न्यायाधीश के 16 फरवरी के आदेश पर मुहर लगा दी. अपने आदेश में उन्होंने धर्मपुरी में अन्नाद्रमुक के तत्कालीन सचिव नेदु उर्फ़ नेदु चेज़ियान, एमजीआर फोरम के कार्यकर्ता माधी उर्फ़ रविचंद्रन और पूर्व पंचायत अध्यक्ष पी. मुनिअप्पन को दोषी मानते हुए मौत की सज़ा सुनाई है. उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के आदेश की पुष्टि करते हुए 25 दूसरे अभियुक्तों को भी सात साल के कठोर कारावास की सज़ा सुनाई है. गौरतलब है कि तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री और अन्नाद्रमुक प्रमुख जयललिता को भ्रष्टाचार के आरोप में दोषी ठहराए जाने के बाद विरोध कर रहे कार्यकर्ताओं ने 2000 में तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय की एक बस में आग लगा दी थी. बस में सवार तमाम लोग भाग निकले थे लेकिन तीन छात्राएं ज़िंदा जल कर मर गई थीं. अदालत ने जिन तीन लोगों को फाँसी की सज़ा सुनाई उन पर हत्या, हत्या का प्रयास और दंगा भड़काने समेत कई आरोप थे. इसके अलावा जिन 25 लोगों को सात साल की कैद की सज़ा दी गई है, उन्हें दंगा भड़काने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने का दोषी पाया गया है. | इससे जुड़ी ख़बरें धर्मपुरी मामले में तीन को फाँसी की सज़ा16 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस मुंबई धमाके: तीन लोगों को मौत की सज़ा18 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस सुशील शर्मा की मौत की सज़ा बरकरार19 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस 'सज़ा माफ़ी गुण-दोष के आधार पर ही'11 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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