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धर्मपुरी मामले में तीन को फाँसी की सज़ा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
तमिलनाडु में धर्मपुरी अग्निकांड मामले में अदालत ने अन्नाद्रमुक के तीन कार्यकर्ताओं को फाँसी की सज़ा सुनाई है. घटना में तीन छात्राएँ ज़िंदा जल गई थीं. सेलम की स्थानीय अदालत ने इस मामले में 25 अन्य लोगों को सात वर्ष क़ैद की सज़ा भी सुनाई है. अदालत ने इससे पहले गुरुवार को इस मामले में 31 आरोपियों में से 28 को दोषी करार दिया था, जबकि दो अभियुक्तों को बरी कर दिया था. एक अभियुक्त की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है. ग़ौरतलब है कि तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री और अन्नाद्रमुक प्रमुख जयललिता को भ्रष्टाचार के आरोप में दोषी ठहराए जाने के बाद विरोध कर रहे कार्यकर्ताओं ने फरवरी, 2000 में एक तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय की बस में आग लगा दी थी. इस बस में सवार ज्यादातर लोग भागने में सफल रहे थे लेकिन तीन छात्राएं ज़िंदा जल गई थीं. अदालत ने जिन तीन लोगों को फाँसी की सज़ा सुनाई है, उन्हें हत्या, हत्या के प्रयास औऱ दंगा भड़काने समेत कई आरोपों में दोषी करार दिया गया था. इसके अलावा जिन 25 लोगों को सात वर्ष क़ैद की सज़ा सुनाई गई है, उन्हें दंगा भड़काने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने का दोषी पाया गया था. | इससे जुड़ी ख़बरें अफ़ज़ल की मौत की सज़ा बरकरार12 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस अफ़ज़ल गुरू ने की क्षमादान की अपील09 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस प्रियदर्शिनी के हत्यारे को मौत की सज़ा30 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'सज़ा माफ़ी गुण-दोष के आधार पर ही'11 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस अदालत ने सुनाई फाँसी की सज़ा18 अगस्त, 2004 | भारत और पड़ोस राष्ट्रपति ने धनंजय की अपील ठुकराई 04 अगस्त, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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