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बुधवार, 11 अक्तूबर, 2006 को 10:06 GMT तक के समाचार
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'सज़ा माफ़ी गुण-दोष के आधार पर ही'

सुप्रीम कोर्ट
सज़ा माफ़ी पर इससे पहले अदालतों ने कुछ नहीं कहा था
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि सज़ा-माफ़ी का फ़ैसला मामले के गुण-दोष के आधार पर होना चाहिए न कि धर्म, जाति या राजनीति के आधार पर.

सर्वोच्च न्यायालय के इस फ़ैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इस समय राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को मोहम्मद अफ़ज़ल गुरु की मौत की सज़ा की माफ़ी के आवेदन पर फ़ैसला देना है.

मोहम्मद अफ़ज़ल गुरु को भारतीय संसद पर 2001 में हुए हमले के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने मौत की सज़ा सुनाई है और फ़ैसले के अनुसार 20 अक्तूबर को फाँसी दी जानी है.

यहाँ स्पष्ट करना ज़रूरी है कि अदालत ने यह फ़ैसला एक दूसरी याचिका पर दिया गया है जिसमें कांग्रेस नेता गौरु वेंकट रेड्डी की सज़ा माफ़ी को चुनौती दी गई थी.

उन्हें हत्या के एक मामले में दस साल की सज़ा सुनाई गई थी लेकिन उनकी क्षमादान याचिका पर कांग्रेस नेता और तत्कालीन राज्यपाल सुशील कुमार शिंदे ने उनकी सज़ा आधी कर दी थी.

दखल का हक़

बुधवार को दिए गए अपने फ़ैसले में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि यदि अदालत को लगता है कि माफ़ी का फ़ैसला 'उचित' नहीं है तो उसे इस मामले में दखल देने का हक़ है.

न्यायमूर्ति अरिजीत पसायत और न्यायमूर्ति एसएच कपाड़िया ने कहा है कि हालांकि कोई स्पष्ट दिशा निर्देश नहीं हैं लेकिन क्षमादान याचिका पर विचार करते हुए यह विचार करना चाहिए कि इसका उस व्यक्ति के परिवार और समाज पर क्या असर पड़ेगा.

अफ़ज़ल की पत्नी और बेटा
अफ़ज़ल की पत्नी ने सज़ा माफ़ी का अनुरोध किया है

भारतीय संविधान के अनुसार राज्यपालों और राष्ट्रपति को सज़ा माफ़ करने के अधिकार हैं.

लेकिन बुधवार को दिए गए फ़ैसले पर विश्लेषकों का कहना है कि इस अर्थ यह है कि यदि अदालत को लगता है कि मौत की सज़ा समाज के व्यापक हित में है तो अदालत माफ़ी देने से इनकार कर सकती है.

अदालत ने अपने फ़ैसले में कहा है, "जाति, धर्म और राजनीतिक प्रतिबद्धता के आधार पर किसी की सज़ा माफ़ नहीं की जा सकती. इसके लिए कोई ठोस वजह होनी चाहिए."

विवाद

सर्वोच्च न्यायालय का फ़ैसला ऐसे समय पर आया है जब मोहम्मद अफ़ज़ल गुरु को मौत की सज़ा दिए जाने को लेकर विवाद चल रहा है.

अफ़ज़ल की पत्नी ने राष्ट्रपति से एक याचिका में कहा है कि उनकी मौत की सज़ा माफ़ कर दी जाए.

मौत की सज़ा को लेकर भारतीय राज्य जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी गुटों की ओर से कई विरोध प्रदर्शन हुए हैं और राजधानी दिल्ली में भी कई मानवाधिकार संगठनों ने फांसी दिए जाने का विरोध किया है.

दूसरी ओर राष्ट्रपति के सामने एक याचिका संसद भवन के हमले में मारे गए सुरक्षाकर्मियों के परिवारजनों ने दी है जिसमें कहा गया है कि मोहम्मद अफ़ज़ल को हर हाल में मौत की सज़ा मिलनी चाहिए.

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मौत की सज़ा के ख़िलाफ़ है लेकिन मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी अफ़ज़ल की सज़ा माफ़ी के ख़िलाफ़ है.

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