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अफ़ज़ल को 20 अक्तूबर को फाँसी होगी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वर्ष 2001 में भारतीय संसद पर हुए हमले के सिलसिले में मोहम्मद अफ़ज़ल को 20 अक्तूबर को फाँसी की सज़ा दी जाएगी. 39 वर्षीय अफ़ज़ल पर आरोप था कि उन्होंने संसद पर हमला करने वाले चरमपंथियों की मदद की थी. दिल्ली की आतंकवाद विरोधी अदालत ने बताया कि अफ़ज़ल को 20 अक्तूबर को सुबह छह बजे फाँसी दी जाएगी. अफ़ज़ल ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी लेकिन उनकी अपील के ख़ारिज होने के बाद फाँसी की तारीख़ की घोषणा की गई है. अफ़ज़ल की वकील कामिनी जायसवाल ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि अगले दो दिनों के भीतर देश के राष्ट्रपति को क्षमादान की याचिका भेजी जाएगी. अगर राष्ट्रपति ने उनकी याचिका को ठुकरा दिया तो अफ़ज़ल को मृत्युदंड दिया जाना तय है. इस मामले के दो अन्य अभियुक्तों एसएआर गिलानी और अफशां गुरू को दिल्ली हाईकोर्ट ने आरोपों से बरी कर दिया था, इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के फ़ैसले को सही ठहराया था. इनके अलावा दोषी पाए गए एक अन्य व्यक्ति शौक़त हुसैन को दस वर्ष के कारावास की सज़ा सुनाई गई थी. 13 दिसंबर 2001 को भारतीय संसद पर हुए हमले में चौदह लोगों की मौत हो गई थी जिनमें पाँचों हमलावर शामिल थे. इस हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में भारी खटास पैदा हो गई थी और नियंत्रण रेखा पर बड़ी संख्या में दोनों ओर से सेना तैनात कर दी गई थी. भारत का कहना रहा है कि इस हमले के पीछे पाकिस्तान स्थित चरमपंथी संगठन लश्करे तैबा का हाथ था. | इससे जुड़ी ख़बरें सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सज़ा पर रोक लगाई19 जनवरी, 2004 | भारत और पड़ोस गिलानी की रिहाई को चुनौती13 दिसंबर, 2003 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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