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सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सज़ा पर रोक लगाई
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने दिसंबर, 2001 में संसद पर हुए हमले के दोषी ठहराए गए दो लोगों की मौत की सज़ा पर रोक लगा दी है. इस मामले पर अब 20 फ़रवरी को सुनवाई होगी. इससे पहले एक निचली अदालत ने मोहम्मद अफ़ज़ल और शौकत हुसैन गुरु को इस हमले की साज़िश में शरीक बताते हुए मृत्युदंड सुनाया था जिसे उच्च न्यायालय ने बहाल रखा था. वैसे पिछले साल अक्तूबर में इस सज़ा को बहाल रखते हुए उच्च न्यायायलय ने दो अन्य व्यक्तियों- दिल्ली विश्विद्यालय के एक लेक्चरर और शौकत गुरु की पत्नी अफ़शां गुरु को इस मामले से बरी कर दिया था. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने गिलानी और अफ़शां गुरु को नोटिस भेज कर कहा है कि वे देश से बाहर न जाएँ.
इन दोनों को अक्तूबर में उच्च न्यायालय के आदेश के बाद रिहा कर दिया गया था. विशेष अदालत ने अपने फ़ैसले में जिन लोगों को मौत की सज़ा सुनाई थी उनमें गिलानी भी शामिल थे जिन्हें बाद में उच्च न्यायालय ने बरी कर दिया था. पुलिस का कहना है कि मोहम्मद अफ़ज़ल और शौक़त हुसैन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े रहे हैं. तेरह दिसंबर, 2001 को हुए इस हमले में कुल 14 लोग मारे गए थे जिनमें पांच हमलावर भी शामिल थे. इनमें से किसी पर भी पुलिस ने हमले में शामिल होने का आरोप नहीं लगाया था क्योंकि हमले में शामिल पांचों लोग उसी दिन मारे गए थे. पुलिस ने इन लोगों पर हमले की साज़िश में शामिल होने और हमलावरों की मदद का आरोप लगाया था. तेरह दिसंबर को संसद पर हुए हमले में कुल 14 लोग मारे गए थे जिनमें पाँच हमलावर भी शामिल थे. |
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