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अफ़ज़ल की मौत की सज़ा बरकरार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सुप्रीम कोर्ट ने मोहम्मद अफ़ज़ल की अपील को ख़ारिज़ करते हुए वर्ष 2001 में संसद पर हुए हमले के मामले में उनकी मौत की सज़ा बहाल रखी है. मोहम्मद अफ़ज़ल ने मौत की सज़ा के फ़ैसले की समीक्षा करने की अपील की थी. सुप्रीम कोर्ट ने अफ़ज़ल के साथ-साथ शौकत हुसैन गुरू की भी उस अपील को ठुकरा दिया है, जिसमें उन्होंने अपनी 10 साल की सज़ा की समीक्षा करने की बात कही थी. वर्ष 2001 में संसद पर हुए हमले की साज़िश रचने के मामले में दोषी ठहराए गए अफ़ज़ल गुरू ने राष्ट्रपति से क्षमादान की भी अपील की है. उनकी पत्नी पहले ही राष्ट्रपति से मिलकर सज़ा माफ़ करने की गुहार लगा चुकी हैं. अफ़ज़ल गुरू फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद हैं. उन्हें पिछले वर्ष अक्तूबर महीने में ही फाँसी दी जानी थी पर क्षमादान की याचिका के बाद इसे फ़िलहाल टाल दिया गया है. विवाद मोहम्मद अफ़ज़ल की फाँसी की सज़ा पर भी राजनीति गरमाई हुई है. विपक्षी दलों की ओर से संसद के शीतकालीन सत्र में और संसद के बाहर भी इस मुद्दे पर व्यापक विरोध-प्रदर्शन होते रहे हैं. दूसरी ओर कुछ मानवाधिकार संगठन अफ़ज़ल के बचाव में आगे आए हैं. उनका कहना है कि अफ़ज़ल को इंसाफ़ नहीं मिला क्योंकि मुक़दमे की शुरुआत में उन्हें वकील की सेवा तक नहीं मिली. विपक्षी भारतीय जनता पार्टी और कुछ अन्य पार्टियों की माँग है कि संसद पर हमले के दोषी को तत्काल फाँसी पर चढ़ाया जाना चाहिए. भारतीय संसद पर 13 दिसंबर, 2001 को हुए हमले में कुल 14 लोग मारे गए थे. इनमें छह पुलिसकर्मी और पाँच चरमपंथी भी थे. | इससे जुड़ी ख़बरें अफ़ज़ल गुरू ने की क्षमादान की अपील09 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस अफ़ज़ल को फाँसी दिया जाना टला 19 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस अफ़ज़ल मामले में निगाहें अब राष्ट्रपति पर 19 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'सज़ा माफ़ी गुण-दोष के आधार पर ही'11 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'मोहम्मद अफ़ज़ल की फाँसी माफ़ न हो'10 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'फाँसी शांति प्रक्रिया के हक़ में नहीं'08 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस अफ़ज़ल के परिजनों की फ़रियाद05 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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