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अफ़ज़ल मामले में निगाहें अब राष्ट्रपति पर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय संसद पर दिसंबर, 2001 में हुए हमले के मामले में चरमपंथियों की मदद के दोषी पाए गए मोहम्मद अफ़ज़ल की फाँसी कुछ दिन टल जाने के बाद अब सारी निगाहें राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम पर टिक गई हैं कि वह इस पर कब और क्या फ़ैसला करते हैं. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार अफ़ज़ल को शुक्रवार को फाँसी दी जानी थी, लेकिन सज़ा माफ़ी की याचिका राष्ट्रपति के पास लंबित है और जब तक इस पर कोई फ़ैसला नहीं हो जाता अफ़ज़ल को फाँसी नहीं दी जा सकती. अब सवाल यह है क्या राष्ट्रपति अफ़ज़ल की मौत की सज़ा को आजीवन कारावास में बदल देंगे या क्या अफ़ज़ल के गले में ज़ल्लाद ही मौत का फंदा डालेगा. हालांकि ये माना जाता है कि राष्ट्रपति कलाम निजी तौर पर मौत की सज़ा के हिमायती नहीं हैं. लेकिन वे संवैधानिक पद पर हैं और संविधान विशेषज्ञों का कहना है कि वे मंत्रिमंडल की सलाह मानने के लिए बाध्य हैं और इसके लिए उन्हें एक प्रक्रिया से गुजरना होगा. राष्ट्रपति कार्यालय का कहना है ‘हमने सज़ा माफ़ी की याचिका सरकार को भेज दी है’. गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने भी याचिका मिलने की पुष्टि की है और चूंकि यह अपराध दिल्ली में हुआ था, लिहाजा याचिका को दिल्ली सरकार को उसकी राय के लिए भेज दिया गया है. इसके बाद अपील मंत्रिमंडल के सामने रखी जाएगी और कैबिनेट की राय से राष्ट्रपति को अवगत करा दिया जाएगा. अगर मंत्रिमंडल मौत की सज़ा को बरक़रार रखता है और राष्ट्रपति इस सलाह से संतुष्ट नहीं हैं तो वे इस फ़ैसले को पुनर्विचार के लिए भेज सकते हैं. मंत्रिमंडल अगर फिर भी अपना निर्णय नहीं बदलता है तो राष्ट्रपति के पास इसे स्वीकार करने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है. संविधान विशेषज्ञ शांति भूषण कहते हैं,'' इन परिस्थितियों में राष्ट्रपति के पास कार्रवाई न करने का एक ही रास्ता बचता है. चूंकि राष्ट्रपति सरकार की सलाह नहीं ठुकरा सकते, लेकिन निर्णय लेने के लिए कोई समयसीमा तय नहीं है.'' समर्थन और विरोध शायद यही वजह है कि सरकार के समक्ष कम से कम 20 सज़ा माफ़ी याचिकाएँ लंबित हैं और अधिकारियों का कहना है कि इनमें से दर्जन भर तो राष्ट्रपति कलाम को अपने पूर्ववर्ती से मिली हैं. कुछ याचिकाएं तो एक दशक से अधिक पुरानी हैं.
मानवाधिकार संगठन कई वर्षों से मौत की सज़ा खत्म करने की मांग करते आ रहे हैं. लेकिन अफ़ज़ल के मामले से यह मामला गरमा गया. भारत प्रशासित कश्मीर समेत अनेक जगह पर विरोध प्रदर्शन भी हुए. फाँसी दिए जाने का विरोध कर रहे लोगों का तर्क है कि अफ़ज़ल का मुकदमा न्यायोचित ढंग से नहीं चला. लेकिन मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ज़ोर देकर कह रही है कि अफ़ज़ल को फाँसी दी जाए. साथ ही भारतीय संसद पर हमले में मारे गए सुरक्षाकर्मियों के परिजनों ने भी धमकी दी है कि अगर अफ़ज़ल की मौत की सज़ा माफ़ कर दी गई तो वे सारे तमगे और सम्मान पत्र लौटा देंगे. |
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